सरकारी नौकरी में एक ही जगह तैनात रहने की जिद नहीं कर सकता पूर्व सैनिक: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सैनिक कल्याण विभाग में कार्यरत एक पूर्व सैनिक के ट्रांसफर के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि राज्य में सरकारी नौकरी स्वीकार करने वाले कर्मचारी को दूसरी जगह भी सेवा देने के लिए तैयार रहना चाहिए। वह लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनात रहने पर जोर नहीं दे सकता।

जस्टिस ज्योत्सना रेवाल दुआ ने जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के पद पर कार्यरत कर्मचारी का चंबा से हमीरपुर ट्रांसफर किए जाने के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने इस बात पर ध्यान दिया कि याचिकाकर्ता राज्य कैडर का कर्मचारी होने के बावजूद नौ साल से अधिक समय तक चंबा में तैनात रहा था।

8 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि कर्मचारी की पारिवारिक जिम्मेदारियों और बुजुर्ग माता-पिता की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के आधार पर उसे उसी स्थान पर बनाए रखने का कोई पर्याप्त कारण नहीं है।

बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल के लिए ट्रांसफर रोकने की मांग

मामला सैनिक कल्याण विभाग के एक कर्मचारी से जुड़ा है, जिसका 3 अक्टूबर 2026 को जिला सैनिक कल्याण कार्यालय, चंबा से हमीरपुर स्थित कार्यालय में ट्रांसफर कर दिया गया था।

READ ALSO  पुलिस इस धारणा के साथ काम नहीं कर सकती है कि हर क्लब/सोसाइटी गैरकानूनी गतिविधियों में लिप्त है: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्मचारी ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उसकी ओर से अधिवक्ता अंजलि सोनी वर्मा ने दलील दी कि वह अपने परिवार का एकमात्र पुरुष सदस्य है और उसके बुजुर्ग माता-पिता उम्र संबंधी बीमारियों से परेशान हैं।

याचिकाकर्ता का कहना था कि इन परिस्थितियों में माता-पिता की देखभाल के लिए उसका चंबा में रहना जरूरी है। इसलिए उसे हमीरपुर भेजने के बजाय चंबा में ही काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

भारतीय सेना में 18 साल से अधिक समय तक दी थी सेवा

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उसने सरकारी नौकरी में आने से पहले भारतीय सेना में 18 साल और नौ महीने तक सेवा दी थी।

READ ALSO  UPTET 2021 | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने परीक्षा में सवालों के ग़लत उत्तर पर सरकार से माँगा जवाब कहा चयन अंतिम आदेश के अधीन रहेगा

इसके बाद 22 मई 2017 को उसे पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित पद पर सैनिक कल्याण विभाग में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के रूप में संविदा आधार पर नियुक्त किया गया था।

उसकी पहली तैनाती जिला सैनिक कल्याण कार्यालय, चंबा में हुई थी। बाद में 1 अक्टूबर 2020 को उसकी सेवाएं नियमित कर दी गईं, लेकिन वह उसी कार्यालय में कार्यरत रहा।

याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि सरकारी नौकरी में नियुक्ति के समय उसकी पिछली सैन्य सेवा को मान्यता दी गई थी और उसी के आधार पर उसके वेतन को भी सुरक्षित रखा गया था।

नौ साल से अधिक समय तक एक ही जगह तैनाती पर हाईकोर्ट ने की टिप्पणी

हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता को उसकी पिछली सैन्य सेवा का लाभ दिया गया था और सरकारी नौकरी में आने के बाद उसका वेतन भी सुरक्षित रखा गया था।

हालांकि, जस्टिस ज्योत्सना रेवाल दुआ ने कहा कि याचिकाकर्ता राज्य कैडर का कर्मचारी है और पिछले नौ साल से अधिक समय से चंबा में ही तैनात रहा है।

READ ALSO  केरल हाईकोर्ट का फैसला: 55 वर्षीय व्यक्ति को 56 की उम्र तक सरोगेसी प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राज्य में सरकारी नौकरी स्वीकार करने के बाद कर्मचारी को अन्य स्थानों पर भी अपनी सेवाएं देनी होंगी।

जस्टिस दुआ ने कहा कि मामले की परिस्थितियों को देखते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में विवेकाधिकार का इस्तेमाल करने का कोई औचित्य नहीं बनता।

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने चंबा से हमीरपुर ट्रांसफर के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles