बच्चे की बीमारी अध्यापिका के अंतरजनपदीय ताबदले का वैध आधार: हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अंतरजनपदीय तबादले को लेकर प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि बच्चे की बीमारी अध्यापिका के अंतरजनपदीय तबादले का वैध आधार है। इससे पहले केवल पति और पत्नी की बीमारी के आधार पर ही अंतरजनपदीय तबादले की मांग की जा सकती थी। 

साथ ही कोर्ट ने कहा कि बच्चे को बीमारी एक संवेदनशील मामला है और इस पर विचार न करके तबादला देने से मना करना अनुचित है। प्रयागराज की सहायक अध्यापिका सईदा रुखसार मरियम रिजवी की याचिका पर यह आदेश जस्टिस अजय भनोट ने दिया। 

याचिकाकर्ता के पक्षकार वकील नवीन शर्मा का कहना था कि अध्यापिका का साढ़े पाँच वर्ष का पुत्र अस्थमा से पीड़ित है। उसके पति लखनऊ में बिजली विभाग में इंजीनियर हैं। वकील का कहना था कि स्थानांतरण संबंधी प्रत्यावेदन खारिज करते वक्त सेवा नियमावली और दो दिसंबर 2019 के शासनादेश का ध्यान नही रखा गया। साथ ही कुमकुम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में दिए गए निर्णय का हवाला दिया । 

कोर्ट का कहना था कि अध्यापक सेवा नियमावली के नियम 8(2) डी का उद्देश्य महिला के हितों की रक्षा करना है। इसलिए उसे उस स्थान पर नियुक्ति दी जानी चाहिए जहाँ उसका पति कार्यरत है। सेवा नियमावली में बच्चे की बीमारी का कोई उल्लेख नही है। किंतु यह अक्षम व्यक्तियों का अधिकार अधिनियम 2016 में दिया गया है। 

2 दिसंबर 2019 का शासनादेश इसी अधिनियम के आधार पर जारी किया गया है। कोर्ट ने तबादले न देने संबंधी 27 फरवरी 2020 के आदेश को खारिज करते हुए बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज को एक महीने में याची के स्थानांतरण की प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्देश दिया है।

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