मुंबई की विशेष NIA अदालत ने एल्गार परिषद मामले के आरोपी हनी बाबू को ईद मनाने के लिए दो महीने के लिए केरल जाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि यह अर्जी “शरारतपूर्ण” है और उच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित जमानत शर्तों के विपरीत है।
विशेष NIA न्यायाधीश चकोर बाविस्कर ने बुधवार को पारित आदेश में कहा कि आरोपी ने एक महीने पहले भी इसी तरह की अर्जी दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। ऐसे में फिर से समान आधार पर अनुमति मांगना न्यायालय के समय की बर्बादी है और हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना के समान होगा।
हनी बाबू को दिसंबर 2025 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने पांच साल से अधिक समय तक बिना ट्रायल हिरासत में रहने के आधार पर जमानत दी थी। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट शर्त लगाई थी कि वे ग्रेटर मुंबई में ही रहेंगे और बिना NIA अदालत की अनुमति शहर से बाहर नहीं जा सकते।
निचली अदालत ने कहा कि आरोपी ने इन शर्तों को “हल्के में” लिया है और बार-बार समान कारणों पर अनुमति मांगना उचित नहीं है।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि ईद मनाने और मेडिकल फॉलो-अप के आधार पर केरल जाने की अनुमति देना उचित नहीं है। कोर्ट ने याद दिलाया कि हाल ही में ही आरोपी को गॉलब्लैडर सर्जरी के लिए केरल जाने और अपनी मां के साथ रहने की अनुमति दी जा चुकी है।
मेडिकल कारणों पर अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी पोस्ट-ऑपरेशन रिपोर्ट सामान्य हैं और आरोपी की स्वास्थ्य स्थिति अच्छी बताई गई है। यदि कोई जांच आवश्यक हो, तो वह मुंबई में ही कराई जा सकती है।
अदालत ने यह भी कहा कि मुंबई में निजी, सरकारी और अन्य अस्पतालों में “विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं” उपलब्ध हैं, इसलिए मामूली कारणों से लंबी यात्रा करना उचित नहीं है।
अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि यदि आरोपी अपनी मां के साथ अधिक समय बिताना चाहता है, तो उसे उन्हें मुंबई लाने पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
न्यायालय ने यह भी कहा कि फरवरी में पारित विस्तृत आदेश के बावजूद समान अर्जी दाखिल करना अनुचित है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों से हटकर कोई आदेश नहीं दे सकती।
न्यायाधीश ने कहा, “यह निश्चित रूप से अदालत का समय नष्ट करने जैसा है,” और इसी आधार पर अर्जी को “शरारतपूर्ण” करार दिया।
यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद कार्यक्रम से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, इस कार्यक्रम में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों के कारण अगले दिन भीमा-कोरेगांव युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क गई थी।
8 जनवरी 2018 को इस संबंध में भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज किया गया था। बाद में इस जांच को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दिया गया, जो वर्तमान में मामले की जांच कर रही है।

