गुजरात हाईकोर्ट में मतदाता सूची संशोधन को चुनौती: कांग्रेस नेताओं का आरोप—74 लाख नामों की मनमानी डिलीशन, नियमों की अनदेखी

सूरत के दो कांग्रेस नेताओं ने गुजरात में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि इस प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है और लाखों मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से हटाए गए हैं।

यह याचिका 10 फरवरी को कांग्रेस के सूरत जिला अध्यक्ष विपुलकुमार उदhnावाला और सेवा दल के मुख्य आयोजक विनोद पाटिल द्वारा दायर की गई। गुजरात हाईकोर्ट की खंडपीठ जिसमें न्यायमूर्ति भार्गव करिया और न्यायमूर्ति एल. एस. पीरजादा शामिल हैं, आने वाले दिनों में इस याचिका पर सुनवाई करेगी।

गुजरात में 4 नवंबर 2025 से 14 दिसंबर 2025 तक SIR अभियान चलाया गया था। इसके बाद 19 दिसंबर को जारी मसौदा मतदाता सूची में लगभग 74 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे मतदाताओं की कुल संख्या 5.08 करोड़ से घटकर 4.34 करोड़ रह गई।

याचिका में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO), सूरत जिला निर्वाचन अधिकारी और सूरत जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचक नामावली पंजीकरण अधिकारियों (EROs) को प्रतिवादी बनाया गया है।

  • फॉर्म-7 में थोक आपत्तियाँ: याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि सत्तारूढ़ पार्टी के कार्यकर्ता बिना दस्तावेजों के फॉर्म-7 में थोक आपत्तियाँ दाखिल कर रहे हैं, जो नियम 13(2) के तहत अवैध है।
  • सूची का प्रकाशन नहीं: नियम 15 और 16 के तहत दावे/आपत्तियों की सूची (Form-11) तैयार कर कार्यालय में प्रदर्शित करना अनिवार्य है, परन्तु यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई।
  • सुनवाई और नोटिस का अभाव: नियम 17 और 21A के अनुसार नाम हटाने से पहले नोटिस देना और सुनवाई का अवसर देना आवश्यक है, लेकिन याचिका में आरोप है कि मतदाताओं को कोई अवसर नहीं दिया गया और सीधे नाम हटा दिए गए।
  • सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की अनदेखी: याचिकाकर्ताओं ने लाल बाबू हुसैन बनाम निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (SC) का हवाला देते हुए कहा कि मतदाता सूची में नाम होने पर उसकी नागरिकता का कानूनी अनुमान होता है और आपत्तिकर्ता पर सबूत देने का भार होता है।
  • नियमों का पालन न करने वाली सभी आपत्तियों को खारिज करने का निर्देश
  • फॉर्म-11 की सूची तैयार कर प्रदर्शित करने का आदेश
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं 216 और 217 के तहत झूठी आपत्तियों पर कार्रवाई
  • मामले के अंतिम निर्णय तक SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग
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याचिका में कहा गया है कि 24 जनवरी को संबंधित अधिकारियों को नोटिस दिया गया था और 29 जनवरी को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को लिखित में शिकायत भी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

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