दो बच्चों के साथ मारपीट व यौन शोषण के आरोपों में गिरफ्तार डॉक्टर को गौहाटी हाईकोर्ट से जमानत; अदालत ने लंबी कैद और धीमी ट्रायल प्रगति का हवाला दिया

गौहाटी हाईकोर्ट ने मंगलवार को मनोचिकित्सक डॉ. संगीता दत्ता को जमानत दे दी, जिन्हें अपने पति के साथ दो साल से अधिक समय पहले दो बच्चों के साथ मारपीट और यौन शोषण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। ये बच्चे दंपति द्वारा गोद लिए जाने का दावा किया गया था।

न्यायमूर्ति अंजन मोनी कलिता ने यह राहत उस आदेश के करीब 20 दिन बाद दी, जिसमें कोर्ट की ही एक अन्य पीठ ने 28 अक्टूबर को सह-आरोपी और पति डॉ. वालिउल इस्लाम को जमानत दी थी।

इस्लाम और परिवार की घरेलू सहायक को 6 मई 2023 को गुवाहाटी से गिरफ्तार किया गया था। वहीं, डॉ. दत्ता — जो स्थानीय टीवी चैनलों के मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में अक्सर दिखाई देती हैं — को अगले दिन शहर से फरार होने की कोशिश के दौरान पकड़ा गया। दंपति और उनकी नौकरानी के खिलाफ IPC की कई धाराओं के साथ-साथ POCSO Act, 2012 की धाराएँ भी लगाई गईं।

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सुनवाई के दौरान, डॉ. दत्ता के वकील एन. जे. दत्ता ने दलील दी कि गिरफ्तारी के समय आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी मुवक्किल पहले ही लंबी अवधि से जेल में है और ट्रायल की गति बेहद धीमी है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि FIR 5 मई 2023 को दर्ज हुई, चार्जशीट 7 जुलाई 2023 को दायर हुई, और आरोप 24 जून 2024 को तय किए गए। लेकिन जमानत याचिका दायर होने तक कुल 74 में से केवल 15 गवाहों की ही गवाही हो पाई थी, जिससे ट्रायल के समय पर पूरा होने पर गंभीर संदेह पैदा होता है।

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वकील ने पूर्व न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में लंबी अवधि की कैद को हतोत्साहित किया गया है, खासकर तब जब सह-आरोपी को पहले ही जमानत मिल चुकी हो।

न्यायमूर्ति कलिता ने इन तर्कों को स्वीकार करते हुए कहा कि लंबे समय से कैद, ट्रायल की धीमी प्रगति और पति को जमानत मिलने जैसे पहलुओं को देखते हुए जमानत देना उचित है।

अदालत ने आदेश में कहा,
“…अदालत का यह विचार है कि आरोपी आवेदक को जमानत पर रिहा करने के लिए मामला बनता है।”

कोर्ट ने निर्देश दिया कि डॉ. संगीता दत्ता को ₹1,00,000 के जमानती बॉन्ड और दो स्थानीय जमानतदारों के साथ रिहा किया जाए। जमानत के तहत सख्त शर्तें लगाई गई हैं — जिसमें उनका पासपोर्ट, आधार और पैन कार्ड ट्रायल कोर्ट में जमा करना, ट्रायल में पूरी तरह सहयोग करना और किसी भी ऐसी गतिविधि से दूर रहना शामिल है जो मामले की प्रगति को प्रभावित कर सकती हो।

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सत्र वाद नं. 112/2023 से जुड़े इस मामले में अभी बड़ी संख्या में गवाहों की गवाही शेष है।

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