आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (ESI Act) की एक महत्वपूर्ण व्याख्या करते हुए कहा है कि जिन प्रतिष्ठानों में 10 से कम कर्मचारी कार्यरत हैं, वे इस अधिनियम के दायरे में नहीं आते, जब तक कि वे पहले से ही इसके तहत पंजीकृत न हों। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिनियम की धारा 1(6) का उपयोग ऐसे प्रतिष्ठानों पर पहली बार ESI लागू करने के लिए नहीं किया जा सकता जो कभी भी निर्धारित न्यूनतम कर्मचारी सीमा को पूरा नहीं करते रहे हों।
यह निर्णय जस्टिस रवि नाथ तिलहरी और जस्टिस चल्ला गुणारंजन की पीठ ने सिविल मिक्सड अपील संख्या 801/2008 में सुनाया, जो कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) के क्षेत्रीय निदेशक द्वारा ESI O.P. No. 75/2005 में नेल्लोर के प्रधान वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने हेतु दाखिल की गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि:
अपीलकर्ता – ESIC के क्षेत्रीय निदेशक (श्री वीणा कल्याण चक्रवर्ती द्वारा, श्री यू.आर.पी. श्रीनिवास की ओर से) – ने यह तर्क दिया कि एम/एस श्री रामकृष्ण राइस मिल, जो एक रजिस्टर्ड पार्टनरशिप फर्म है, ESI कानून के तहत आती है क्योंकि वहां आवश्यक संख्या में कर्मचारी कार्यरत थे।

वहीं, राइस मिल ने यह दावा किया कि 1980 से संचालन में होने के बावजूद, उन्होंने कभी भी 9 से अधिक कर्मचारी नहीं रखे, और वे सभी या तो दिहाड़ी मजदूर थे या अनुबंध पर कार्यरत थे। इसलिए, वे ESI अधिनियम के दायरे में नहीं आते।
प्रधान वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश, नेल्लोर ने राइस मिल के पक्ष में निर्णय देते हुए ESI निगम को ₹88,657 की वसूली राशि वापस करने का आदेश दिया। इसके विरुद्ध ESIC ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।
कानूनी प्रश्न:
कोर्ट के समक्ष मुख्य कानूनी सवाल यह था: क्या 1989 के संशोधन से जोड़ी गई धारा 1(6) का प्रभाव यह है कि अब किसी फैक्ट्री को ESI कानून के तहत लाने के लिए कर्मचारियों की संख्या अप्रासंगिक हो गई है — भले ही वह फैक्ट्री पहली बार कवर हो रही हो?
अदालत की व्याख्या:
कोर्ट ने ESI अधिनियम की धारा 2(12) का हवाला दिया, जिसमें “फैक्ट्री” की परिभाषा 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाली निर्माण इकाई के रूप में दी गई है। न्यायाधीशों ने कहा कि जब तक यह न्यूनतम सीमा पूरी नहीं होती, तब तक ESI कानून पहली बार लागू नहीं किया जा सकता।
पीठ ने स्पष्ट कहा कि धारा 1(6) केवल उन्हीं मामलों में लागू होती है जहां पहले से कोई फैक्ट्री ESI अधिनियम के अधीन हो और बाद में कर्मचारियों की संख्या घट जाए। यह धारा नए प्रतिष्ठानों को कानून के दायरे में लाने के लिए उपयोग नहीं की जा सकती, जिन्होंने कभी न्यूनतम सीमा पूरी नहीं की।
कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ESIC बनाम राधिका थिएटर (AIR Online 2023 SC 52) के फैसले को अलग बताया, यह कहते हुए कि उस मामले में थिएटर पहले से अधिनियम के तहत कवर था, इसलिए वहां धारा 1(6) की निरंतरता लागू हुई थी।
अंतिम निर्णय:
हाईकोर्ट ने ESIC की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत का आदेश बरकरार रखा और कहा:
“चुनौती दिए गए आदेश में कोई अवैधता नहीं है। अपील में कोई महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न नहीं उठता, इसलिए इसे खारिज किया जाता है।”
साथ ही, कोर्ट ने ESIC को आदेश दिया कि वह एम/एस श्री रामकृष्ण राइस मिल से वसूली गई राशि वापस करे और स्पष्ट किया कि धारा 1(6) का विस्तार उन फैक्ट्रियों तक नहीं किया जा सकता, जो मूल रूप से ESI के लिए पात्र ही नहीं थीं।