दिल्ली मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ने 75.67 लाख रुपये का मुआवजा दिया; कहा– ‘विकृति आजीवन वंचना का प्रतीक’

दिल्ली के मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने एक सड़क हादसे में 70 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता झेल चुके 23 वर्षीय युवक को ₹75.67 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह हादसा अगस्त 2023 में सरिता विहार मेट्रो स्टेशन के पास हुआ था, जब एक तेज रफ्तार ट्रक ने उसकी स्कूटी को पीछे से टक्कर मार दी थी।

अध्यक्ष शेली अरोड़ा ने अपने आदेश (दिनांक 30 अक्टूबर 2025) में कहा कि यह दुर्घटना लापरवाह और तेज रफ्तार ड्राइविंग के कारण हुई थी। उन्होंने कहा कि घायल को शारीरिक और मानसिक दोनों रूपों में भारी आघात पहुँचा है, जिससे उसका पूरा जीवन प्रभावित हुआ है।

घायल व्यक्ति अनिल अपने दो दोस्तों — कृष्णन गोपाल और केतन कुमार — के साथ स्कूटी पर यात्रा कर रहा था। ट्रक ने पीछे से टक्कर मारी, जिससे गोपाल की मौके पर ही मौत हो गई और केतन घायल हो गया।

अनिल की 70 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता साबित हुई। आदेश में कहा गया:

“घायल का दाहिना पैर घुटने के नीचे से काटा गया है। विकृति का अर्थ है शरीर या रूप में ऐसा परिवर्तन जिससे किसी व्यक्ति की आकृति या स्वरूप बिगड़ जाए, जो दुर्घटना में लगी चोटों के कारण हुआ है।”

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अदालत ने कहा कि मुआवजा केवल चिकित्सा खर्च या आय के नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन की मूलभूत सुविधाओं और सुखों से वंचित होने के लिए भी है।

निर्णय में कहा गया कि मुआवजा तय करते समय पीड़ित की उम्र और उस वंचना को ध्यान में रखना चाहिए जो उसे जीवनभर झेलनी होगी।

“यह मुआवजा पीड़ित को उसकी उस स्थिति के लिए दिया जाता है जिसमें वह सामान्य व्यक्ति की तरह जीवन की मूलभूत सुविधाओं का आनंद नहीं ले सकता, उसकी आयु और उसे झेलनी पड़ने वाली वंचनाओं को देखते हुए यह उचित है।”

अदालत ने माना कि दुर्घटना ट्रक चालक की लापरवाही से हुई और विभिन्न मदों में कुल ₹75.67 लाख का मुआवजा निर्धारित किया गया — जिसमें चिकित्सा व्यय, भविष्य की आय की हानि, वेदना व पीड़ा, विकृति और कृत्रिम अंग की लागत शामिल है।

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अधिकरण ने न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आदेश दिया कि वह पूरी मुआवजा राशि जमा करे ताकि पीड़ित की दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा और पुनर्वास सुनिश्चित हो सके।

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