केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ प्रदर्शन: सुरक्षा संबंधी याचिका पर तत्काल सुनवाई से दिल्ली हाईकोर्ट का इनकार

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 6 जून को होने वाले विरोध प्रदर्शन के खिलाफ दायर याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ की ओर से दायर इस याचिका में प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगड़ने और सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएं जताई गई थीं।

शुक्रवार को जस्टिस सौरभ बनर्जी और जस्टिस अमित शर्मा की वेकेशन बेंच ने इस याचिका को तत्काल सूचीबद्ध (लिस्ट) करने से साफ मना कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से इस मामले पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया था, जिसे बेंच ने स्वीकार नहीं किया।

परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ प्रदर्शन की अपील

यह पूरा विवाद परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ है। सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं के संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने इसके विरोध में 6 जून को दिल्ली में प्रदर्शन का आह्वान किया है। संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके ने छात्रों और समर्थकों से अपील की है कि वे शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली पहुंचें और 6 जून को जंतर-मंतर के साथ-साथ हवाई अड्डे पर भी एकत्र हों। इस डिजिटल मुहिम को सोशल मीडिया पर काफी समर्थन मिला है, जिसमें कई सार्वजनिक हस्तियां भी शामिल हैं।

सुरक्षा और नियंत्रण के पुख्ता इंतजामों की मांग

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इस प्रदर्शन के जवाब में ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ ने कोर्ट का रुख किया। याचिका में मांग की गई थी कि सुरक्षा के मद्देनजर इंदिरा गांधी इंटरनेशनल (आईजीआई) एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशनों और दिल्ली की सीमाओं (हाईवे एंट्री पॉइंट्स) पर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के तत्काल इंतजाम किए जाएं।

याचिकाकर्ता ने अदालत से यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया था कि इस प्रदर्शन को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित या नियंत्रित किया जाए। याचिका में दलील दी गई थी कि इस भीड़ की वजह से अस्पताल, रेलवे स्टेशन, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट जैसी आवश्यक सेवाओं और महत्वपूर्ण संस्थानों के कामकाज में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए।

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विदेशी सर्वरों से भीड़ जुटाने का आरोप

दायर जनहित याचिका (PIL) में संगठन की गतिविधियों को लेकर कई गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ विदेशों में स्थित सर्वरों का उपयोग कर युवाओं को एक अनियंत्रित भीड़ के रूप में तब्दील कर रही है। याचिका में दावा किया गया है कि इसके पीछे देश के संस्थानों को अस्थिर करने का एक अंतरराष्ट्रीय एजेंडा काम कर रहा है।

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याचिका में मांग की गई कि अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से इस आंदोलन को हवा दे रहे लोगों पर लगाम लगाने के लिए पूरे प्रदर्शन की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी कराई जाए या फिर इस जमावड़े को किसी अन्य सुरक्षित और निर्धारित स्थान पर भेजा जाए, ताकि हवाई अड्डे की सुरक्षा और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित न हों।

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