100 साल पुरानी मस्जिद और कब्रिस्तान की ज़मीन से अतिक्रमण हटाने के आदेश पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र, एमसीडी और वक्फ बोर्ड से जवाब मांगा

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को मास्जिद सय्यद फैज़ इलाही और उससे सटे कब्रिस्तान की जमीन से कथित अतिक्रमण हटाने के एमसीडी के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर शहरी विकास मंत्रालय, दिल्ली नगर निगम (MCD), दिल्ली वक्फ बोर्ड और अन्य एजेंसियों से जवाब मांगा है।

न्यायमूर्ति अमित बंसल ने संबंधित विभागों को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और कहा कि यह “मामला विचारणीय है”। अगली सुनवाई के लिए मामला 22 अप्रैल को सूचीबद्ध किया गया है।

बताया गया है कि 10 नवंबर 2025 को दिल्ली के लाल किले के पास हुए आत्मघाती कार बम विस्फोट से पहले हमलावर उमर उन नबी ने पुरानी दिल्ली स्थित इस 100 वर्ष पुरानी मस्जिद में प्रवेश किया और वहां करीब 10 मिनट तक रुका। विस्फोट में 15 लोगों की मौत हो गई थी।

इस हमले के दो दिन बाद, 12 नवंबर को हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एमसीडी और लोक निर्माण विभाग (PWD) को तुरकमान गेट स्थित रामलीला मैदान के आसपास के 38,940 वर्ग फुट क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था।

इस आदेश के अनुपालन में एमसीडी ने 22 दिसंबर 2025 को आदेश जारी किया जिसमें कहा गया कि 0.195 एकड़ (934 वर्ग गज) लीज पर दी गई जमीन से बाहर मौजूद सभी ढांचे अवैध हैं और गिराए जाएंगे। एमसीडी ने यह भी कहा कि मस्जिद समिति या दिल्ली वक्फ बोर्ड ने अतिरिक्त भूमि पर स्वामित्व या वैध कब्जे का कोई दस्तावेजी साक्ष्य पेश नहीं किया है।

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मस्जिद प्रबंधन समिति द्वारा दाखिल याचिका में इस आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। याचिका में दावा किया गया है कि अतिरिक्त भूमि वक्फ अधिनियम के तहत अधिसूचित वक्फ संपत्ति है और इससे जुड़े विवादों पर फैसला लेने का अधिकार केवल वक्फ ट्रिब्यूनल को है। समिति का कहना है कि वह वक्फ बोर्ड से लीज लेकर यह भूमि उपयोग कर रही है और किराया भी चुका रही है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि न तो समिति और न ही वक्फ बोर्ड को उस जनहित याचिका में पक्ष बनाया गया, जिसके आधार पर अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया गया। इतना ही नहीं, अक्टूबर 2025 में जब प्रशासन ने संयुक्त सर्वे किया था, तब भी समिति को कोई सुनवाई का मौका नहीं दिया गया।

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याचिकाकर्ता के वकील ने स्पष्ट किया कि समिति को ‘बारात घर’ और निजी क्लिनिक जैसे ढांचों को हटाने पर कोई आपत्ति नहीं है, जो पहले ही बंद हो चुके हैं। उनका एकमात्र अनुरोध कब्रिस्तान को लेकर है, जिसे प्रभावित न किया जाए।

भूमि और विकास कार्यालय (L&DO) की ओर से पेश वकील ने एमसीडी के आदेश का बचाव करते हुए कहा कि यह आदेश हाईकोर्ट के 12 नवंबर के निर्देश के अनुसार पारित किया गया है, जिसे अभी तक किसी ने चुनौती नहीं दी है। उन्होंने यह भी कहा कि उस सुनवाई में वक्फ बोर्ड के वकील को सुना गया था।

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एमसीडी के वकील ने बताया कि 15 फरवरी 1940 को लीज पर दी गई 0.195 एकड़ जमीन के भीतर के किसी ढांचे पर कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है।

अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, जिस 38,940 वर्ग फुट के अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया गया, उसमें एक सड़क का हिस्सा, फुटपाथ, बारात घर, पार्किंग स्थल और एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर शामिल हैं।

4 जनवरी 2026 को एमसीडी अधिकारियों ने साइट पर जाकर अतिक्रमण चिह्नित करने की कोशिश की थी, लेकिन स्थानीय निवासियों के विरोध के कारण भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

अब यह मामला 22 अप्रैल को फिर से अदालत के सामने आएगा, जिसमें यह तय किया जाएगा कि क्या वक्फ ट्रिब्यूनल इस विवाद को सुनने का उचित मंच है और क्या एमसीडी ने आदेश पारित करने से पहले प्रक्रिया का पालन किया।

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