दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को राजधानी के होटलों, क्लबों और रेस्तरां में आगजनी जैसी घटनाओं से बचाव के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने को लेकर संबंधित अधिकारियों को एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कार्या की खंडपीठ ने यह आदेश उस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसे अधिवक्ता अर्पित भार्गव ने दायर किया था। याचिका में राजधानी के इन प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा सहित संपूर्ण सुरक्षा ऑडिट कराकर क्षेत्रवार रिपोर्ट सौंपने की मांग की गई थी।
अदालत ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता ने कोर्ट आने से पहले संबंधित अधिकारियों से कोई संपर्क नहीं किया। पीठ ने कहा,
“रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है जिससे यह प्रतीत हो कि याचिकाकर्ता ने पहले संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया हो।”
इसके साथ ही अदालत ने याचिका को संबंधित अधिकारियों के समक्ष अभ्यावेदन (representation) के रूप में मानने का निर्देश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।
“अधिकारियों को निर्देश दिया जाता है कि वे इस अभ्यावेदन पर नियमों और कानून के अनुसार शीघ्र निर्णय लें और ऐसी कार्ययोजना बनाएं जिससे आग लगने जैसी घटनाओं और अन्य हादसों से बचा जा सके,” अदालत ने कहा।
यह याचिका अधिवक्ता सार्थक शर्मा और मोहित यादव के माध्यम से दायर की गई थी, जिसमें दिल्ली सरकार, नगर निगम (MCD) और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) को पक्षकार बनाया गया।
याचिका में राजधानी के होटलों, क्लबों और रेस्तरां में सुरक्षा ऑडिट कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने, कमियों की स्थिति में सुधारात्मक कदम उठाने, आगजनी में मृत या घायल व्यक्तियों के परिजनों के लिए मुआवज़ा नीति बनाने और दोषी अधिकारियों की ज़िम्मेदारी तय करने की मांग की गई थी।
याचिका में दिसंबर 2025 में गोवा में हुए नाइटक्लब अग्निकांड का उल्लेख करते हुए दावा किया गया कि दिल्ली में भी कई प्रतिष्ठान ऐसे हैं जो नियमों की अनदेखी कर संचालन कर रहे हैं और आम जनता की जान को खतरे में डाल रहे हैं।
“उद्देश्य यह है कि जनता की जान की रक्षा की जा सके और ऐसी मुआवज़ा/हानि नीति लागू की जाए जिससे कोई व्यक्ति जानबूझकर कानून का उल्लंघन करने की न सोचे। इससे कानून का पालन स्वेच्छा से होने लगेगा और दीर्घकाल में अधिकारियों का काम भी आसान होगा,” याचिका में कहा गया।
अब यह मामला संबंधित अधिकारियों के विचाराधीन रहेगा, जिन्हें हाईकोर्ट ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द ठोस कदम उठाएं ताकि भविष्य में किसी तरह की त्रासदी को रोका जा सके।

