मामलों के निपटारे में देरी से वादियों का न्यायिक व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा: सुप्रीम कोर्ट

यह देखते हुए कि यदि कानूनी प्रक्रिया कछुआ गति से आगे बढ़ती है तो वादकारियों का मोहभंग हो सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पुराने मामलों की शीघ्र सुनवाई और निपटान सुनिश्चित करने के लिए कुछ उच्च न्यायालयों सहित निर्देश जारी किए।

न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने लंबित मामलों पर राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) के देशव्यापी आंकड़ों का हवाला दिया और कहा कि इस मुद्दे से निपटने के लिए बार और बेंच द्वारा संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता है।

पीठ ने कहा, “जब कानूनी प्रक्रिया धीमी गति से चलती है तो वादी निराश हो सकते हैं। हमने अपनी पीड़ा व्यक्त की है जहां एनजेडीजी के अनुसार कुछ मुकदमे ” पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में 50 वर्षों से लंबित हैं।

READ ALSO  एल्गर मामला: डीयू प्रोफेसर हनी बाबू की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र, एनआईए को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

न्यायमूर्ति कुमार ने कहा, “जब देरी जारी रहेगी तो वादकारियों का न्यायिक प्रणाली पर से भरोसा उठ जाएगा।”

पीठ ने कहा कि वादियों को बार-बार स्थगन मांगने में सावधानी बरतनी चाहिए।

न्यायाधीशों ने लंबित मामलों से निपटने के लिए 11 निर्देश जारी करते हुए कहा, “…उन्हें पीठासीन अधिकारियों की अच्छाई को अपनी कमजोरी के रूप में नहीं लेना चाहिए।”

पीठ ने कहा कि पांच साल से अधिक समय से लंबित मामलों की निगरानी संबंधित उच्च न्यायालयों द्वारा की जानी चाहिए।

READ ALSO  बीएसईएस डिस्कॉम को बड़ा झटका: कैग ऑडिट के खिलाफ दायर याचिका दिल्ली हाईकोर्ट से खारिज
Ad 20- WhatsApp Banner

Related Articles

Latest Articles