कोविड प्रोटोकॉल का पालन ना करने पर पुलिस नागरिकों को मार नहीं सकती: हाईकोर्ट

हाल ही में, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस अधिकारी किसी ऐसे व्यक्ति को जो मास्क नहीं पहने हो या पीटने या  कोविड प्रोटोकॉल का पालन ना कर रहा हो, तो शारीरिक दंड नहीं दिया जा सकता है।

पृष्ठभूमि:

इंदौर और परदेशीपुरा में तैनात दो पुलिस कांस्टेबलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिन्होंने रिक्शा चालकों पर शारीरिक बल का इस्तेमाल किया था। याचिकाकर्ता ने प्रार्थना की कि इस मामले की विस्तार से जांच की जानी चाहिए और पुलिस द्वारा गलत कामों के खिलाफ शिकायतों की जांच के लिए एक शिकायत प्रकोष्ठ का गठन किया जाना चाहिए।

विवाद:-

इंडियन एक्सप्रेस के एक लेख का हवाला दिया गया जिसमें कहा गया था कि दो पुलिस कांस्टेबलों ने एक ऑटो चालक को ठीक से मास्क न पहनने के लिए बेरहमी से पीटा था।

आरोप है कि पुलिस ने मालवा गिल गेट पर ऑटो चालक से पूछताछ की और उसे अपने साथ थाने आने को कहा; हालांकि, ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि उसके पिता की तबीयत ठीक नहीं है और वह थाने नहीं आ सकता, लेकिन पुलिस उसे जबरदस्ती खींचकर थाने ले आई।

एक अन्य घटना का हवाला दिया गया जब एक वकील और दो पत्रकारों के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किया गया। वकील ने पुलिस द्वारा की गई अन्य ज्यादतियों पर भी प्रकाश डाला।

कोर्ट की निर्णय:- 

वर्तमान मामले में कोर्ट ने शेखर चौधरी बनाम मध्य प्रदेश राज्य में अपने पहले के निर्देश को दोहराया। अदालत ने कहा कि पुलिस को उन नागरिकों को पीटने या शारीरिक दंड देने की अनुमति नहीं दी, जो मास्क नहीं पहने हुए या कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे थे।

पीठ ने कहा कि पुलिस को लोगों को कड़ी सजा देने के बजाय उन्हें कोविड प्रोटोकॉल के बारे में जागरूक करना चाहिए और उनसे मास्क पहनने और सामाजिक दूरी का पालन करने का आग्रह करना चाहिए।

हाई कोर्ट  ने पुलिस अधीक्षक को नागरिकों की पिटाई करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।

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