उत्तर प्रदेश के एक उपभोक्ता आयोग ने जेब में मोबाइल फोन फटने से घायल हुए व्यक्ति के मामले में मोबाइल निर्माता कंपनी और स्थानीय दुकानदार को दोषपूर्ण फोन बदलने या उसकी कीमत 29,500 रुपये वापस करने का आदेश दिया है। आयोग ने दोनों पक्षों को इलाज पर खर्च हुए 36,139 रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 5,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया है।
आयोग के अध्यक्ष हसनैन कुरैशी और सदस्य पूर्णिमा सिंह राजपूत ने माना कि शिकायतकर्ता के आरोपों का विपक्षी पक्षों की ओर से कोई खंडन नहीं किया गया। ऐसे में मोबाइल फोन में खराबी होने और सेवा में कमी की बात साबित होती है।
बार-बार गर्म हो रहा था मोबाइल, शिकायत के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने वर्ष 2020 में 29,500 रुपये में एक मोबाइल फोन खरीदा था। कुछ समय बाद फोन असामान्य रूप से गर्म होने लगा।
जब उसने इसकी शिकायत की, तो उसे बताया गया कि कभी-कभी मोबाइल फोन गर्म हो जाते हैं। हालांकि, इसके बाद भी फोन गर्म होने की समस्या बनी रही।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसने दोबारा स्थानीय दुकानदार से संपर्क किया, लेकिन उसकी शिकायत पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
वर्ष 2023 में मोबाइल फोन अचानक उसकी जेब में ही फट गया, जिससे उसके अंगूठे में चोट लग गई। घटना के बाद उसने पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई।
शादी की फोटो और वीडियो खराब होने पर मांगा करीब एक करोड़ रुपये का मुआवजा
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि मोबाइल फटने की घटना में उसकी शादी की तस्वीरें और वीडियो भी खराब हो गए।
उसका दावा था कि शादी की यादें नष्ट होने से उसे गहरा मानसिक आघात पहुंचा और उसे अस्पताल में भर्ती होना पड़ा।
शिकायतकर्ता के अनुसार, पुरानी तस्वीरें और वीडियो खराब होने के कारण उसे अपनी पत्नी के साथ दोबारा शादी का समारोह आयोजित करना पड़ा, ताकि नई तस्वीरें खिंचवाई जा सकें और वीडियो बनवाए जा सकें।
उसने दोबारा समारोह आयोजित करने और फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी पर हुए खर्च के लिए 51 लाख रुपये मांगे। इसके अलावा मानसिक सदमे, डिप्रेशन और इलाज के लिए 48 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की।
इस तरह उसने कुल 99.29 लाख रुपये का दावा किया। हालांकि, आयोग की आर्थिक अधिकार सीमा को देखते हुए उसने अपनी मांग 50 लाख रुपये तक सीमित कर दी।
कंपनी ने देरी से दिया जवाब, दुकानदार ने नहीं लड़ा मामला
मामले की सुनवाई के दौरान मोबाइल निर्माता कंपनी ने निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद अपना जवाब दाखिल किया। आयोग ने इसे महत्व नहीं दिया।
वहीं, स्थानीय दुकानदार ने मामले का विरोध ही नहीं किया।
आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों का कोई खंडन नहीं किया गया था। इस आधार पर आयोग ने माना कि मोबाइल फोन खराब था और सेवा में कमी हुई थी।
आयोग ने शिकायतकर्ता के मेडिकल रिकॉर्ड पर भी गौर किया। इन दस्तावेजों से पुष्टि हुई कि वह अस्पताल में भर्ती रहा और उसके इलाज पर 36,139 रुपये खर्च हुए।
नया मोबाइल दें या 29,500 रुपये लौटाएं: उपभोक्ता आयोग
सभी तथ्यों और दस्तावेजों पर विचार करने के बाद आयोग ने मोबाइल निर्माता कंपनी और दुकानदार को निर्देश दिया कि वे शिकायतकर्ता को खराब फोन के बदले नया मोबाइल दें या उसकी खरीद कीमत 29,500 रुपये वापस करें।
इसके साथ ही आयोग ने इलाज पर खर्च हुए 36,139 रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 5,000 रुपये देने का आदेश दिया।
हालांकि, शिकायतकर्ता ने शादी की तस्वीरें और वीडियो खराब होने तथा मानसिक परेशानी के लिए बड़ी रकम का मुआवजा मांगा था, लेकिन आयोग ने दस्तावेजों से साबित इलाज के खर्च और मुकदमे के खर्च तक ही आर्थिक राहत सीमित रखी।

