अपराध से पहले खरीदी गई संपत्ति PMLA कुर्की से मुक्त नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने यह महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत स्पष्ट किया है कि किसी अनुसूचित अपराध (Scheduled Offence) के होने से पहले खरीदी गई संपत्तियां प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (PMLA) के तहत कुर्की से स्वतः सुरक्षित नहीं हैं। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि “अपराध की आय” (Proceeds of Crime) की परिभाषा में “ऐसी किसी भी संपत्ति का मूल्य” शामिल है, जो जांच एजेंसियों को यह अधिकार देता है कि यदि प्रत्यक्ष रूप से अर्जित काली कमाई उपलब्ध न हो, तो वे उसके बराबर मूल्य की वैध संपत्तियों को कुर्क कर सकें।

हाईकोर्ट ने पूर्व आईएएस अधिकारी रानू साहू और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा दायर नौ अपीलों को खारिज कर दिया। इन अपीलों में निर्णायक प्राधिकरण (AA) और अपीलीय न्यायाधिकरण (SAFEMA) द्वारा पारित संपत्तियों की कुर्की के आदेशों को चुनौती दी गई थी।

मामले की पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित ‘कोयला लेवी घोटाले’ से जुड़ा है। आरोप है कि सूर्यकांत तिवारी के नेतृत्व में एक सिंडिकेट ने सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर राज्य में परिवहन किए जाने वाले कोयले पर प्रति टन ₹25 की अवैध वसूली की थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि रानू साहू ने कोरबा और रायगढ़ के जिला कलेक्टर के रूप में इस वसूली में सहायता की और बदले में लगभग ₹5.52 करोड़ की रिश्वत प्राप्त की। आरोप के अनुसार, इस राशि को परिवार के सदस्यों के नाम पर संपत्तियां खरीदकर ‘लेयर’ किया गया। ED ने 15 जुलाई, 2020 से पहले खरीदी गई 19 संपत्तियों को “मूल्य के बराबर” और उसके बाद खरीदी गई संपत्तियों को “प्रत्यक्ष आय” के रूप में कुर्क किया था।

पक्षों की दलीलें

अपीलकर्ताओं की ओर से वकील सुश्री सौम्या गुप्ता ने तर्क दिया कि अधिकांश संपत्तियां अपराध की कथित अवधि (जुलाई 2020) से बहुत पहले खरीदी गई थीं, इसलिए उनकी कुर्की कानूनन गलत है। उन्होंने कहा:

  • बेंगलुरु में दर्ज मूल FIR में किसी भी अनुसूचित अपराध (जैसे धारा 384 IPC) के तहत आरोप पत्र दाखिल नहीं किया गया था, इसलिए PMLA की कार्यवाही का कोई आधार नहीं बचता।
  • ED का पूरा मामला एक तीसरे पक्ष (रजनीकांत तिवारी) की “काल्पनिक” और “अपुष्ट” डायरी प्रविष्टियों पर आधारित है।
  • PMLA की धारा 5(1) के दूसरे प्रावधान (Second Proviso) के तहत कुर्की के लिए जिस “आपात स्थिति” की आवश्यकता होती है, वह इस मामले में मौजूद नहीं थी।
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ED की ओर से डॉ. सौरभ कुमार पांडे ने दलीलों का विरोध करते हुए कहा:

  • जांच से एक गहरी साजिश का पता चला है जिसमें रानू साहू मुख्य लाभार्थी थीं।
  • डायरी की प्रविष्टियों की पुष्टि व्हाट्सएप चैट, बैंक स्टेटमेंट और PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों से हुई है।
  • अधिनियम की धारा 2(1)(u) के तहत ‘अपराध की आय’ में उसके समतुल्य मूल्य की संपत्ति शामिल है, जिससे पुरानी संपत्तियों की कुर्की पूरी तरह वैध है।
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हाईकोर्ट का विश्लेषण और निष्कर्ष

हाईकोर्ट ने PMLA की धारा 2(1)(u) के व्यापक दायरे पर जोर देते हुए कहा:

“अपराध की आय की परिभाषा इतनी व्यापक है कि यह न केवल अनुसूचित अपराध से जुड़ी आपराधिक गतिविधि के परिणामस्वरूप प्राप्त संपत्ति को संदर्भित करती है, बल्कि ऐसी किसी भी संपत्ति के मूल्य को भी शामिल करती है… ऐसी व्याख्या अपराध की आय की वसूली में विधायी मंशा को आगे बढ़ाएगी।”

अपराध से पहले अर्जित संपत्तियों की कुर्की पर खंडपीठ ने कहा:

“कथित अपराध की अवधि से पहले खरीदी गई संपत्तियां, भले ही वे प्रथम दृष्टया आपराधिक गतिविधि से जुड़ी न हों, फिर भी कुर्की के अधीन हो सकती हैं, बशर्ते कि (i) अपराध की आय का अस्तित्व स्थापित हो, और (ii) ऐसी आय के बराबर का मूल्य प्रत्यक्ष रूप से दागी संपत्तियों से वसूल नहीं किया जा सकता हो।”

कोर्ट ने अनुसूचित अपराध के अस्तित्व को चुनौती देने वाली दलील को भी खारिज कर दिया। साथ ही, धारा 50 के तहत दर्ज बयानों की वैधता को बरकरार रखते हुए कहा कि इन्हें “न्यायिक कार्यवाही” माना जाता है और इनका कानूनी महत्व अधिक है। कोर्ट ने यह भी पाया कि अपीलकर्ता संपत्तियों की खरीद के लिए उपयोग किए गए धन के स्रोत का कोई “ठोस स्पष्टीकरण” देने में विफल रहे, जो उनकी ज्ञात आय से कहीं अधिक प्रतीत होता है।

हाईकोर्ट ने सभी अपीलों को मेरिट के आधार पर खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि अपीलकर्ता PMLA की धारा 8(8) के तहत अपनी संपत्तियों की वापसी के लिए कानूनी रास्ता अपना सकते हैं, यदि वे अंततः दोषमुक्त हो जाते हैं।

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मामले का विवरण

केस का शीर्षक: रानू साहू बनाम उप निदेशक, प्रवर्तन निदेशालय (और संबंधित अपीलें)

केस संख्या: MA संख्या 26/2026

पीठ: मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल

दिनांक: 22 अप्रैल, 2026

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