कलकत्ता हाईकोर्ट ने वकीलों से बदसलूकी की घटना पर लिया संज्ञान, याचिकाएं दर्ज करने का आदेश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने वकीलों के साथ भीड़ द्वारा की गई बदसलूकी की घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए मामले को गंभीरता से निपटाने के लिए याचिकाएं दर्ज करने का आदेश दिया है। यह निर्देश मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवगणनम की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सोमवार को दिया।

यह घटना 25 अप्रैल को घटी थी, जब वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाश रंजन भट्टाचार्य और उनके सहयोगियों को हाईकोर्ट भवन के सामने स्थित उनके चेंबर के बाहर कुछ लोगों ने घेरकर कथित रूप से अपशब्द कहे और परेशान किया। पीड़ित वकीलों का कहना है कि हमलावर कुछ वादकारियों से जुड़े हो सकते हैं।

घटना के बाद, मुख्य न्यायाधीश टी एस शिवगणनम और न्यायमूर्ति चैताली चटर्जी (दास) की खंडपीठ ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे अधिवक्ता महाधिवक्ता, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और हाईकोर्ट के तीनों बार संगठनों — बार एसोसिएशन, बार लाइब्रेरी क्लब और इनकॉरपोरेटेड लॉ सोसाइटी — के सचिवों को नोटिस भेजें।

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मुख्य न्यायाधीश शिवगणनम ने वकीलों की सुरक्षा के प्रति अदालत की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि याचिकाएं दर्ज होते ही उन्हें उनके समक्ष प्रस्तुत किया जाए ताकि आवश्यक आदेश जारी किए जा सकें। उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें 25 अप्रैल की शाम इस घटना की जानकारी दी गई थी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत पुलिस और महाधिवक्ता से संपर्क साधा था।

महाधिवक्ता किशोर दत्ता ने मुख्य न्यायाधीश को आश्वस्त किया कि उसी शाम पुलिस ने क्षेत्र को खाली कराकर स्थिति को सामान्य कर दिया था। कोर्ट ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और अदालत परिसर के आसपास वकीलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।

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