पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी को कानूनी मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें भवानीपुर निर्वाचन क्षेत्र से उनकी उम्मीदवारी को चुनौती दी गई थी। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब अधिकारी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच होने वाला कड़ा मुकाबला तय कार्यक्रम के अनुसार ही आगे बढ़ेगा।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख करते हुए शुभेंदु अधिकारी को चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि भाजपा नेता ने ऐसी सार्वजनिक टिप्पणियां की हैं जो देश के ‘धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने’ (secular fabric) के खिलाफ हैं। याचिकाकर्ता का तर्क था कि इस तरह के बयानों के आधार पर उनकी उम्मीदवारी रद्द की जानी चाहिए।
हालांकि, प्रारंभिक सुनवाई के दौरान ही यह कानूनी चुनौती कमजोर पड़ गई। मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि संविधान के किस प्रावधान के तहत इन आधारों पर किसी की उम्मीदवारी रद्द की जा सकती है।
अदालती कार्यवाही के दौरान, याचिकाकर्ता कोर्ट के सवालों का संतोषजनक जवाब देने में विफल रहा। वह ऐसा कोई संवैधानिक या कानूनी तर्क पेश नहीं कर सका जो अधिकारी की उम्मीदवारी रद्द करने की मांग का समर्थन करता हो। मामले में कोई दम न पाते हुए, खंडपीठ ने याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और इसे सिरे से खारिज कर दिया।
शुभेंदु अधिकारी का पक्ष रख रहे अधिवक्ता बिल्वदल भट्टाचार्य ने दावा किया कि यह याचिका किसी वास्तविक कानूनी चिंता के बजाय राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से दायर की गई थी, ताकि भवानीपुर में अधिकारी के चुनाव प्रचार को प्रभावित किया जा सके।
294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भवानीपुर सीट सबसे चर्चित मुकाबला बन गई है। ममता बनर्जी के पूर्व सहयोगी रहे शुभेंदु अधिकारी, जो अब भाजपा का चेहरा हैं, सीधे तौर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख को चुनौती दे रहे हैं।
राज्य में विधानसभा चुनाव कई चरणों में संपन्न हो रहे हैं। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को पूरा हो चुका है, जबकि भवानीपुर समेत अन्य क्षेत्रों में दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। चुनाव के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।

