बॉम्बे हाई कोर्ट ने पुणे में जमीन से जुड़े 76 साल पुराने विवाद को समाप्त करते हुए यरवडा क्षेत्र में स्थित लगभग एक एकड़ जमीन को मूल भूमि स्वामी एम. एम. एच. जनमोहम्मद के कानूनी वारिसों के बीच बांटने का आदेश दिया है। अदालत के इस आदेश के साथ 1950 से लंबित चल रहा मुकदमा आखिरकार समाप्त हो गया।
न्यायमूर्ति फरहान दुबाश की एकल पीठ ने 27 फरवरी को दिए अपने फैसले में फरवरी 1950 में दायर उन याचिकाओं का निपटारा कर दिया, जिनमें जनमोहम्मद के वारिसों ने संपत्तियों के बंटवारे और अपने हिस्से की मांग की थी।
अदालत ने आदेश दिया कि यरवडा में स्थित लगभग 4,271 वर्ग मीटर (करीब एक एकड़) जमीन को जनमोहम्मद के कानूनी उत्तराधिकारियों के बीच विभाजित किया जाए।
मामले की पृष्ठभूमि में जनमोहम्मद की पुणे स्थित दो बड़ी संपत्तियां थीं—एक डेक्कन कॉलेज रोड पर और दूसरी यरवडा में। मार्च 1950 में इन संपत्तियों के संबंध में प्रारंभिक विभाजन का आदेश पारित किया गया था।
इसके बाद महाराष्ट्र सरकार ने डेक्कन कॉलेज रोड वाली जमीन का अधिग्रहण कर लिया था और उसके बदले मिलने वाला मुआवजा सभी कानूनी वारिसों के बीच बांट दिया गया था।
हालांकि, यरवडा में स्थित लगभग 16 एकड़ जमीन को लेकर विवाद बना रहा। इस भूमि पर कई अन्य लोगों ने भी अधिकार का दावा किया, जिनमें उस प्रबंधक के वारिस भी शामिल थे जिसे जनमोहम्मद ने अपने जीवनकाल में नियुक्त किया था। उनका दावा था कि यह जमीन उन्हें बकाया कर्ज के बदले दी गई थी।
साल 1955 में वारिसों के बीच एक समझौता हुआ, जिससे विवाद के कई हिस्सों का समाधान हो गया। इसके बावजूद लगभग एक एकड़ जमीन का मामला अनसुलझा रह गया और वही हिस्सा लंबे समय तक न्यायालय में विचाराधीन रहा।
अब हाई कोर्ट ने इस शेष भूमि को जनमोहम्मद के कानूनी वारिसों के बीच बांटने का निर्देश देकर इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का अंत कर दिया है।

