बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को दोहराया कि जब तक भगोड़े कारोबारी विजय माल्या भारत नहीं लौटते, तब तक उनकी याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा जिसमें उन्होंने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (Fugitive Economic Offenders Act) की वैधता को चुनौती दी है।
मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि माल्या को पहले यह स्पष्ट करना होगा कि क्या वे भारत लौटने को तैयार हैं।
“आप (माल्या) को वापस आना होगा… अगर आप नहीं आ सकते, तो हम यह याचिका नहीं सुन सकते,” कोर्ट ने कहा।
माल्या, जो मार्च 2016 से यूके में रह रहे हैं, ने हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की हैं— एक उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित करने के आदेश को चुनौती देने के लिए और दूसरी 2018 में बने एफईओ अधिनियम की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाते हुए।
विशेष पीएमएलए कोर्ट ने जनवरी 2019 में माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था।
पीठ ने कहा कि मामले की सुनवाई 18 फरवरी को होगी और उससे पहले माल्या को हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करना होगा कि वे भारत लौटेंगे या नहीं।
“हमें रिकॉर्ड करना पड़ सकता है कि आप न्यायिक प्रक्रिया से बच रहे हैं। आप इस तरह कार्यवाही का लाभ नहीं उठा सकते,” मुख्य न्यायाधीश ने कहा।
कोर्ट ने दिसंबर 2025 की पिछली सुनवाई में भी स्पष्ट कर दिया था कि वह याचिका पर सुनवाई तभी करेगा जब माल्या भारत लौटें। अब कोर्ट ने निर्देश दिया है कि माल्या एक स्पष्ट हलफनामा दाखिल करें जिसमें वे भारत लौटने की अपनी मंशा स्पष्ट करें।
माल्या की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने दलील दी कि ऐसे मामलों में याचिकाकर्ता की शारीरिक उपस्थिति आवश्यक नहीं है और पूर्व निर्णयों में यह माना गया है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में माल्या की संपत्तियां पहले ही जब्त की जा चुकी हैं।
वहीं केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध करते हुए कहा:
“वह पहले भारत आएं, फिर देखा जाएगा कि वे उत्तरदायी हैं या नहीं। कानून पर भरोसा नहीं करके वह इस प्रकार कोर्ट की प्रक्रिया का लाभ नहीं उठा सकते।”
मेहता ने कहा कि माल्या ने एफईओ कानून को तभी चुनौती दी जब उनके खिलाफ लंदन में प्रत्यर्पण कार्यवाही अंतिम चरण में पहुंच गई। उन्होंने यह भी बताया कि माल्या ने अपने हलफनामे में कहा है कि बैंकों की ओर से की गई धनवसूली अनुचित थी।
किंगफिशर एयरलाइंस के जरिए ₹9,000 करोड़ से अधिक की ऋण चूक के आरोपों और कई मनी लॉन्ड्रिंग मामलों का सामना कर रहे माल्या मार्च 2016 में भारत से भाग गए थे। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कराने के लिए विशेष अदालत में आवेदन दिया था, जिसे जनवरी 2019 में मंजूरी मिली।

