बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा पीठ ने कोलवाले स्थित सेंट्रल जेल में कैदियों के लिए मोबाइल चार्जिंग प्वॉइंट्स लगे होने पर कड़ी नाराजगी जताई है और जेल प्रशासन को मोबाइल फोन व मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति श्रीराम वी. शिरसाट ने अपने आदेश में कहा कि यह “अंतरात्मा को झकझोरने वाली बात” है कि जेल के भीतर बैरकों में चार्जिंग प्वॉइंट्स लगाए गए और जेल अधिकारियों को इसकी जानकारी तक नहीं थी।
यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आया जिसमें आरोपी चंदू पाटिल, जो एक बच्चे की हत्या के आरोप में जेल में बंद है, पर आरोप है कि उसने जेल से ही मृतक के परिवार को धमकी भरे फोन किए।
कोर्ट ने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब जेल में मोबाइल फोन और नशीले पदार्थ मिले हैं, लेकिन इसके बावजूद जेल प्रशासन ने इन गतिविधियों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
न्यायालय ने टिप्पणी की—
“सिर्फ उस कैदी पर कार्रवाई करना, जिसके पास मोबाइल या मादक पदार्थ मिला हो, समाधान नहीं है। असली समस्या की जड़ तक जाना ज़रूरी है।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि जेल में मोबाइल फोन कैसे पहुंचते हैं, यह समझ से परे है, खासकर तब जब जेल प्रशासन नियमित निरीक्षण का दावा करता है।
“क्या यह निरीक्षण सिर्फ औपचारिकता है या जानबूझकर लापरवाही बरती जा रही है जिससे मोबाइल फोन आसानी से जेल के अंदर पहुंच सकें?”— अदालत ने सवाल उठाया।
कोर्ट ने माना कि जेल में मोबाइल सिग्नल जैमिंग सिस्टम शायद मौजूद नहीं हैं और इसे तुरंत स्थापित करने की आवश्यकता है। साथ ही निर्देश दिया कि:
- जेल परिसर में सख्त जैमिंग सिस्टम या सेलुलर निरीक्षण प्रणाली लगाई जाए, जिसकी सीमा केवल जेल परिसर तक सीमित हो ताकि आसपास के निवासियों पर असर न पड़े।
- जेल के प्रवेश बिंदु पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं (यदि पहले से नहीं हैं)।
- कैदियों की व्यक्तिगत तलाशी सीसीटीवी की निगरानी में हो।
- “मुलाकात क्षेत्र” में कैमरों की निगरानी अनिवार्य की जाए।
- जेल बैरकों का रोजाना निरीक्षण अनिवार्य हो।
- हर दिन की सीसीटीवी फुटेज को पेनड्राइव में सुरक्षित कर डिप्टी एसपी को सौंपा जाए।
चंदू पाटिल के मामले में हाईकोर्ट ने कहा कि केवल शो-कॉज नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। संबंधित तारीख और समय की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल टावर की लोकेशन की जांच की जानी चाहिए।
“ऐसी गतिविधियों पर नरम दंड से कैदियों का हौसला बढ़ता है।” — अदालत ने कहा।
अदालत ने जेल प्रशासन से 20 जनवरी 2026 तक विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है और स्पष्ट किया कि अगर अब भी सुधार नहीं हुआ तो न्यायालय को और गहराई से दखल देना पड़ेगा।
“अब वक्त आ गया है कि जेल प्रशासन इस गंभीर मुद्दे को गंभीरता से ले और तुरंत कठोर व व्यापक सुधारात्मक कदम उठाए।” — आदेश में कहा गया।

