कथित अपराध से वर्षों पहले खरीदी गई संपत्तियाँ ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ नहीं: बॉम्बे हाईकोर्ट ने अनिल देशमुख मामले में वकील के खिलाफ ED की PMLA कार्रवाई रद्द की

बॉम्बे हाईकोर्ट ने पूर्व महाराष्ट्र गृहमंत्री अनिल देशमुख से जुड़े कथित किकबैक मामले में नागपुर के अधिवक्ता किशोर देवानी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामले को रद्द कर दिया है। अदालत ने कहा कि देवानी के खिलाफ PMLA के तहत कोई मामला नहीं बनता और कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

न्यायमूर्ति अश्विन भोबे की एकलपीठ ने सोमवार को पारित आदेश में विशेष PMLA अदालत द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को भी निरस्त कर दिया।

यह मामला सीबीआई द्वारा अनिल देशमुख और अन्य के खिलाफ दर्ज उस एफआईआर से उत्पन्न हुआ था, जिसमें आरोप था कि देशमुख ने गृहमंत्री रहते हुए मुंबई के बार मालिकों से वसूली की थी।

ED का आरोप था कि देशमुख परिवार से कथित रूप से जुड़ी फ्लोरिश प्रॉपर्टीज प्राइवेट लिमिटेड से लगभग ₹2.20 करोड़ की राशि देवानी की कंपनी प्रीमियर पोर्ट लिंक्स को मिली, जो “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” थी और देवानी ने उसे संपत्ति खरीद के माध्यम से छिपाने और वैध दिखाने में सहायता की।

देवानी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर ED की शिकायत और विशेष अदालत के संज्ञान आदेश को चुनौती दी, यह कहते हुए कि उनका किसी कथित अपराध से कोई संबंध नहीं है।

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हाईकोर्ट ने ED के मामले में समय-क्रम (chronology) को निर्णायक माना। अदालत ने पाया कि जिन संपत्तियों को लेकर आरोप लगाए गए, वे 2005 से 2007 के बीच खरीदी गई थीं, जबकि अभियोजन के अनुसार अनुसूचित अपराध और कथित “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच उत्पन्न हुए।

अदालत ने कहा:

“अतएव, निर्विवाद रूप से इन संपत्तियों का ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम’ से कोई संबंध नहीं हो सकता, क्योंकि अनुसूचित अपराध से संबंधित कृत्य इनके अधिग्रहण के बाद, अर्थात दिसंबर 2020 से फरवरी 2021 के बीच हुए।”

पीठ ने यह भी कहा कि ED देवानी की संपत्ति लेन-देन और कथित अवैध आय के बीच कोई संबंध स्थापित करने में विफल रहा है और यह दिखाने के लिए भी कोई सामग्री नहीं है कि उन्होंने जानबूझकर धन शोधन में सहायता की।

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अदालत ने कहा कि देवानी के खिलाफ मामला जारी रखना “कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग” होगा।

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने:

  • देवानी के खिलाफ ED की शिकायत रद्द कर दी, और
  • विशेष PMLA अदालत द्वारा लिया गया संज्ञान आदेश निरस्त कर दिया।

इस प्रकार देवानी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की कार्यवाही समाप्त हो गई।

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