बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को यूके में रहने वाले डॉक्टर और यूट्यूबर संग्राम पाटिल द्वारा दायर याचिका पर मुंबई पुलिस को नोटिस जारी किया। पाटिल ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और जारी लुकआउट सर्कुलर (LOC) को रद्द करने की मांग की है। उन पर भाजपा नेताओं के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक पोस्ट डालने का आरोप है।
न्यायमूर्ति अश्विन भोबे की एकल पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह इस याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल करे और मामले की अगली सुनवाई के लिए 4 फरवरी की तारीख तय की।
पाटिल, जो ब्रिटिश नागरिक हैं और महाराष्ट्र के जलगांव जिले के मूल निवासी हैं, को 10 जनवरी को मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारत आगमन के समय रोका गया था। उन्हें करीब 15 घंटे तक पूछताछ में रखा गया। इसके बाद 16 जनवरी को जब वे मैनचेस्टर लौटने वाले थे, तो उन्हें फिर से रोका गया और देश छोड़ने की अनुमति नहीं दी गई।
याचिका में पाटिल ने कहा कि उन्हें एफआईआर के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और वे स्वेच्छा से भारत आए थे। उनके खिलाफ मामला दिसंबर 2025 में दर्ज किया गया था, जिसकी शिकायत महाराष्ट्र भाजपा के सोशल मीडिया संयोजक निखिल भामरे ने की थी। भामरे ने पुलिस को बताया कि उन्होंने इंटरनेट पर पाटिल की आपत्तिजनक पोस्ट देखी, पार्टी नेताओं से चर्चा की और फिर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
पाटिल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप पासबोला ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को एफआईआर की कोई सूचना नहीं दी गई थी और उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया है। उन्होंने कहा कि पाटिल अब तक तीन बार अपराध शाखा के सामने पेश हो चुके हैं।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने अदालत को बताया कि पाटिल पुलिस जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
हालांकि, कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया और पुलिस को नोटिस जारी करते हुए कहा कि वह हलफनामा दाखिल करे।
अदालत ने अभी तक LOC पर कोई रोक या एफआईआर पर स्थगन नहीं दिया है। अब अगली सुनवाई 4 फरवरी को होगी।

