गेटवे ऑफ इंडिया पर नया पैसेंजर जेट्टी परियोजना: बॉम्बे हाई कोर्ट ने सशर्त दी मंजूरी, पर्यावरणीय संतुलन पर दिया ज़ोर

बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार को दक्षिण मुंबई स्थित ऐतिहासिक गेटवे ऑफ इंडिया पर नए पैसेंजर जेट्टी और टर्मिनल के निर्माण को सशर्त मंजूरी दे दी। यह निर्णय मुंबई में समुद्री यात्री सुविधाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुख्य न्यायाधीश आलोक अराध्ये और न्यायमूर्ति संदीप मरने की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार के इस परियोजना पर आगे बढ़ने के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि यह सतत विकास (सस्टेनेबल डेवलपमेंट) के सिद्धांतों के अनुरूप है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार का यह नीतिगत निर्णय “मनमानी, तर्कहीनता या विचारहीनता” से ग्रस्त नहीं है।

महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड द्वारा प्रस्तावित इस परियोजना में नया टर्मिनल प्लेटफॉर्म, 150 वाहनों की पार्किंग व्यवस्था, वीआईपी लाउंज, फूड कोर्ट, कैफे और एम्फीथिएटर शामिल होगा। हालांकि, अदालत ने यह सुनिश्चित करने के लिए कुछ स्पष्ट सीमाएं निर्धारित की हैं कि यह विकास केवल सार्वजनिक उपयोग के लिए हो और व्यावसायिक मनोरंजन स्थल न बन जाए।

पीठ ने कहा कि एम्फीथिएटर का उपयोग केवल यात्रियों के बैठने के लिए किया जा सकता है, न कि किसी भी प्रकार के मनोरंजन कार्यक्रमों के लिए। इसी प्रकार, प्रस्तावित रेस्टोरेंट और कैफे केवल पानी और पैक्ड फूड उपलब्ध करा सकेंगे, न कि पूर्ण रेस्टोरेंट के रूप में कार्य करेंगे।

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कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि परियोजना पूर्ण होने के बाद वर्तमान में उपयोग हो रहे चार जेट्टी—जिनका हर साल लगभग 35 लाख यात्री उपयोग करते हैं—को भारतीय नौसेना के निर्देशों के अनुसार चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाए। हालांकि, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा उपयोग में लाया जा रहा एक अलग जेट्टी चालू रहेगा।

अदालत ने टिप्पणी की, “हमारे विचार में यह परियोजना सतत विकास के उस सिद्धांत पर खरी उतरती है, जिसमें पर्यावरण को न्यूनतम क्षति पहुँचाकर विकास कार्य किया जा रहा है।” यह टिप्पणी उन याचिकाओं के जवाब में दी गई थी जिनमें पर्यावरणीय क्षति की आशंका जताई गई थी।

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याचिकाकर्ताओं ने गेटवे ऑफ इंडिया जैसे धरोहर स्थल के पास निर्माण कार्य से संभावित पर्यावरणीय नुकसान पर चिंता व्यक्त की थी। लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नियामक उपायों और विवेकपूर्ण योजना के साथ किया गया विकास पर्यावरण की सुरक्षा के विपरीत नहीं होता। पीठ ने कहा, “विकास की चाह पर्यावरण का अपमान नहीं है, यदि वह सततता के संतुलित मार्ग पर, नियमों और विवेक की निगरानी में चले।”

यह नया जेट्टी दक्षिण मुंबई और पड़ोसी रायगढ़ जिले के अलीबाग के बीच फेरी यात्रियों के लिए चढ़ने-उतरने का प्रमुख स्थान बनेगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस सुविधा का उपयोग न तो माल ढुलाई के लिए किया जाएगा और न ही मछली बाजार के संचालन के लिए।

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