बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को एक अंतरिम आदेश जारी करते हुए फिल्म निर्माता संतोष कुमार पर निर्देशक आदित्य धर के खिलाफ किसी भी तरह के आरोप दोहराने पर रोक लगा दी है। धर ने अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ की स्क्रिप्ट चोरी करने के आरोपों को मानहानि बताते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने याचिका में तर्क दिया कि बार-बार लगाए जा रहे ये झूठे आरोप उनकी व्यावसायिक प्रतिष्ठा को “अपूरणीय क्षति” पहुंचा रहे हैं।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर ने पाया कि आदित्य धर ने राहत पाने के लिए एक मज़बूत प्रथम दृष्टया मामला (prima facie case) पेश किया है। कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल के लिए तय की है।
यह कानूनी विवाद 2025 की हिट फिल्म ‘धुरंधर’ के सीक्वल ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की रिलीज के बाद शुरू हुआ। मुकदमे के अनुसार, प्रतिवादी संतोष कुमार ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि आदित्य धर ने उनकी पंजीकृत स्क्रिप्ट ‘डी साहब’ (D Saheb) की चोरी की है।
शुरुआत में, धर ने संतोष कुमार को कानूनी नोटिस भेजकर साहित्यिक चोरी (plagiarism) के सभी दावों को खारिज किया था और उन्हें भविष्य में ऐसे बयान देने से बचने के लिए कहा था। हालांकि, जब कुमार ने इस नोटिस का कोई जवाब नहीं दिया, तो धर ने कानूनी फर्म ‘डीएसके लीगल’ के माध्यम से बॉम्बे हाईकोर्ट में स्थायी निषेधाज्ञा और हर्जाने की मांग करते हुए मुकदमा दायर किया।
आदित्य धर का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने दलील दी कि प्रतिवादी द्वारा स्क्रिप्ट चोरी के लगातार और निराधार दावे मानहानिकारक हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि ये टिप्पणियां विशेष रूप से फिल्म उद्योग में निर्देशक की छवि को धूमिल करने के उद्देश्य से की जा रही थीं।
अंतरिम आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति आरिफ डॉक्टर ने नोट किया कि वादी (आदित्य धर) अंतरिम सुरक्षा प्राप्त करने के लिए कानूनी मानदंडों को पूरा करने में सफल रहे हैं।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “अगली सुनवाई तक, प्रतिवादी (कुमार) को मुकदमे में बताए गए शब्दों और टिप्पणियों को दोहराने और इसी तरह की प्रकृति के अन्य सभी आरोपों को लगाने से रोका जाता है।”
अदालत का यह प्रतिबंध अप्रैल के मध्य में होने वाली अगली सुनवाई तक ‘धुरंधर’ की स्क्रिप्ट की चोरी या स्वामित्व से संबंधित सभी समान टिप्पणियों और आरोपों पर लागू रहेगा।

