बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया है कि वे सुप्रीम कोर्ट के उस अंतरिम आदेश का तुरंत प्रचार-प्रसार करें, जिसमें न्यायिक कार्यवाहियों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना अनुमति सोशल मीडिया या अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करने, पोस्ट करने, मॉनेटाइज करने या किसी भी रूप में इस्तेमाल करने पर रोक लगाई गई है। BCI ने कहा है कि इस आदेश को उसकी 17 जुलाई 2026 की सोशल मीडिया आचरण और डिजिटल एथिक्स संबंधी सर्कुलर के साथ पढ़ा और लागू किया जाना चाहिए।
28 जुलाई 2026 को जारी सर्कुलर में BCI ने बताया कि यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा 24 जुलाई 2026 को Harshita Grover बनाम Union of India एवं अन्य मामले में पारित आदेश के बाद जारी किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?
सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में कहा है कि उसकी या किसी भी हाईकोर्ट की न्यायिक कार्यवाही की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिंग को बिना संबंधित कोर्ट की पूर्व अनुमति के निकालना, शेयर करना, पोस्ट करना, री-पोस्ट करना, अपलोड करना, मॉनेटाइज करना, संशोधित करना या किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होस्ट करना प्रतिबंधित रहेगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि यह आदेश सुप्रीम कोर्ट और सभी हाईकोर्ट की वेबसाइटों पर सार्वजनिक जानकारी के लिए उपलब्ध कराया जाए।
BCI ने अपने पुराने सर्कुलर का भी किया जिक्र
BCI ने कहा कि 17 जुलाई 2026 को जारी उसके सर्कुलर में पहले ही साफ किया गया था कि अदालत की लाइव स्ट्रीमिंग का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और लोगों को कानूनी जानकारी उपलब्ध कराना है। इसका मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति कोर्ट की कार्यवाही के हिस्सों को काटकर, एडिट करके, सनसनीखेज बनाकर, मॉनेटाइज करके या मीम, म्यूजिक, भ्रामक कैप्शन और कमेंट्री के साथ सोशल मीडिया पर वायरल करे। सर्कुलर में यह भी कहा गया था कि संबंधित कोर्ट की लिखित अनुमति के बिना लाइव स्ट्रीम की गई कार्यवाही का दोबारा इस्तेमाल या प्रकाशन नहीं किया जा सकता।
राज्य बार काउंसिलों को क्या करना होगा?
BCI ने सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया है कि वे अपनी आधिकारिक वेबसाइट के होमपेज पर प्रमुखता से तीन दस्तावेज अपलोड करें:
- 24 जुलाई 2026 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश
- 17 जुलाई 2026 का BCI सर्कुलर
- 17 जुलाई 2026 के कार्यान्वयन संबंधी निर्देश
सर्कुलर में कहा गया है कि इन दस्तावेजों को ऐसी जगह प्रकाशित किया जाए जहां अधिवक्ताओं की आसानी से नजर पड़े। इन्हें केवल आर्काइव या किसी अंदरूनी सेक्शन में डालना पर्याप्त नहीं होगा।
बार एसोसिएशनों और अधिवक्ताओं तक भी पहुंचाने होंगे निर्देश
BCI ने राज्य बार काउंसिलों से कहा है कि वे इन दस्तावेजों को अपने अधिकार क्षेत्र की सभी मान्यता प्राप्त बार एसोसिएशनों को भेजें। बार एसोसिएशनों को इन्हें अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर लगाने के साथ-साथ अपने सदस्यों तक भी पहुंचाना होगा।
BCI ने यह भी स्पष्ट किया कि सिर्फ वेबसाइट पर सर्कुलर डाल देना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। राज्य बार काउंसिलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि हर नामांकित अधिवक्ता और हर मान्यता प्राप्त बार एसोसिएशन तक यह जानकारी पहुंचे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के साथ भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी और दोनों दस्तावेज एक साथ प्रसारित किए जाएंगे।
तीन कार्यदिवस में देनी होगी रिपोर्ट
BCI ने सभी राज्य बार काउंसिलों से तीन कार्यदिवस के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में वेबसाइट का लिंक और यह पुष्टि शामिल होगी कि आदेश और सर्कुलर सभी अधिवक्ताओं तथा मान्यता प्राप्त बार एसोसिएशनों तक पहुंचा दिए गए हैं। BCI ने इस पूरी प्रक्रिया को तत्काल लागू करने के निर्देश दिए हैं।

