बार काउंसिल के नियमों में नवीनतम संशोधन अभी तक CJI द्वारा अनुमोदित नहीं हुए है: बीसीआई ने केरल हाई कोर्ट में बताया

आज बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा केरल हाई कोर्ट को बताया गया कि हाल ही में किये गए संशोधन को अभी तक भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI ) द्वारा अनुमोदित नहीं किया गया है।

बीसीआई के वकील ने कहा कि जिन नियमों को चुनौती दी गयी है वो अभी लागू नहीं हुए हैं। नए संशोधन को चुनौती देने वाली रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति पीबी सुरेश कुमार ने BCI के वकील का बयान दर्ज किया।

अधिवक्ता अधिनियम की धारा 49(1) में अधिवक्ताओं के व्यवहार से सम्बंधित नियमों में संशोधन से पहले CJI की अनुमति की आवश्यकता होती है।

भाग V (‘समाज और बार के प्रति कर्तव्य’) और भाग VA (‘बार काउंसिल के सदस्यों के लिए आचार संहिता और अयोग्यता’) को जोड़ने के साथ बार काउंसिल ऑफ इंडिया नियम के भाग VI के अध्याय II में नया संशोधन 25 जून 2021 को आधिकारिक राजपत्र में अधिसूचित किया गया था।

नय संशोधनों ने काफी हलचल मचाई, क्योंकि नए नियम के अनुसार, किसी भी अदालत, न्यायाधीश, स्टेट बार काउंसिल या बीसीआई के खिलाफ कोई भी अभद्र या अपमानजनक, मानहानिकारक, प्रेरित, दुर्भावनापूर्ण या शरारती बयान देने वाले वकील का लाइसेंस निलंबित या रद्द हो सकता है। 

संशोधन में आगे कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र में स्टेट बार काउंसिल या बार काउंसिल ऑफ इंडिया के किसी भी फैसले की आलोचना करना या चुनौती देना “कदाचार” होगा, जिसके परिणामस्वरूप अयोग्यता या निलंबन हो सकता है।

केरल बार काउंसिल के सदस्य राजेश विजयन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए नए संशोधन को चुनौती दी है।

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