गृहमंत्री अमित शाह के कारण जम्मू कश्मीर में नए बदलाव हुए है: जस्टिस अरुण मिश्रा

NHRC (राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग) के 28 वें स्थापना दिवस कार्यक्रम के लिए अपने संबोधन के दौरान, NHRC के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने कहा कि 21 वीं सदी में दुनिया में राजनीतिक हिंसा के कारण लगभग 120 मिलियन लोग मारे गए और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि ऐसी घटनाएं दुनिया भर में और भारत में होती रहती हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इन निर्दोष लोगों के हत्यारों को महिमामंडित नहीं किया जा सकता और ऐसे आतंकवादी स्वतंत्रता सेनानियों को बुलाना अनुचित था।

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उन्होंने सामाजिक सेवा संगठनों और मानवाधिकार संगठनों से इस तरह की राजनीतिक कार्रवाइयों की निंदा करने का भी अनुरोध किया। न्

यायमूर्ति मिश्रा के अनुसार, इस संबंध में उदासीनता कट्टरवाद को जन्म देती है और इतिहास हमें माफ नहीं करेगा और इस तरह के कार्यों का दृढ़ता से विरोध करने का समय आ गया है।

अपने संबोधन में उन्होंने यह भी कहा कि श्री अमित शाह के प्रयासों के कारण और उनके कारण जम्मू-कश्मीर उत्तर पूर्व में नए बदलाव हुए हैं।

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न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि मानवाधिकारों को बढ़ावा देने में भारत सबसे आगे है और मानव जीवन को एक नया आयाम मिला है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कैसे कई देशों में ऐसा तंत्र मौजूद नहीं था।

वैदिक साहित्य का भी उल्लेख किया गया और उसमें मानवाधिकारों को कैसे स्वीकार किया गया और उन्होंने यह भी कहा कि दुर्गा पूजा इस बात का उदाहरण है कि महिलाएं कैसे शक्ति की अवतार थीं।

पिछले बीस वर्षों में एचएनआरसी की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आयोग द्वारा मानवाधिकारों से संबंधित 20 लाख से अधिक मामलों का समाधान किया गया है। उन्होंने आगे कहा कि आयोग ने कुल मिलाकर 205 रुपये मुआवजे की भी सिफारिश की है।

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