मनमानी गिरफ्तारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की वजह: हाई कोर्ट

प्रयागराज—–इलाहाबाद हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि अगर किसी आपराधिक केस में आरोपी बनाए गए शख्स को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ करना जरूरी हो तभी उसे अरेस्ट किया जाय। एफआईआर दर्ज होते ही गिरफ्तार कर लेना मनमाना कार्य है। और यह व्यक्ति के मौलिक तथा मनावाधिकार का साफ तौर पर उल्लंघन है।मनमानी गिरफ्तारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है।

कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता मौलिक अधिकार हैं। जिसके हनन की छूट नही जा सकती। जहां पूछताछ के लिए अभिरक्षा में लेना आवश्यक हो,वहीं आरोपि व्यक्ति को हिरासत में लेना चाहिए। गिरफ्तारी अंतिम विकल्प होना चाहिए। इसी के साथ कोर्ट ने झांसी जनपद के सीपरी बाजार थाना क्षेत्र के दहेज उत्पीड़न एंव सुसाइड के लिए दुष्प्रेरित के आरोपी धर्मेंद्र की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली। 

याचिकाकर्ता का कहना था कि उसकी शादी वर्ष 2004 में हुई थी। दहेज मांगने व आत्महत्या करने के लिए मजबूर करने का आरोप बेबुनियाद है। याची के पिता ने पाँच सितंबर 2020 की घटना के बाद 9 दिसंबर को ही पुलिस को लेटर लिखा है कि उसकी बहू के परिजन गहने व नकदी ले गए हैं। और केस करने की धमकी दे रहे हैं।

जिसके बाद एक एफआईआर भी दर्ज हो गई है, जिसमे पुलिस गिरफ्तार कर सकती है। इसलिए अग्रिम जमानत की मंजूरी दी जाय। जब कि मृतका के घरवालों के कहना है कि याची पति शराबी और जुआरी है। उठाने पत्नी के गहने बेच दिए है। जिंदगी से तंग आकर लड़की ने फांसी लगा आत्महत्या कर ली।

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जिसके लिये पति और उनके घरवाले दोषी है। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर दर्ज है। बिना जरूरत के पुलिस गिरफ्तार कर सकती है। इसलिए पुलिस रिपोर्ट पर कोर्ट के संज्ञान लेने तक याची की गिरफ्तारी न की जाय। पुलिस 50 हजार के निजी मुचलके व दो प्रतिभूति पर याची को गिरफ्तारी के वक्त रिहा करे। कोर्ट ने पुलिस को जल्द विवेचना पूर्ण करने का निर्देश दिया है।

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