इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ पीठ) ने उत्तर प्रदेश सरकार को वक्फ ट्रिब्यूनल में रिक्त पदों को शीघ्र भरने का निर्देश दिया है ताकि वहां प्रभावी सुनवाई सुनिश्चित की जा सके। यह निर्देश न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने फैसल खान द्वारा दायर एक रिट याचिका का निस्तारण करते हुए दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दूसरी रिट याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, क्योंकि उन्हें पूर्व के एक आदेश में पहले ही अपील दायर करने की स्वतंत्रता दी जा चुकी थी।
मामले की पृष्ठभूमि
याचिकाकर्ता, फैसल खान ने अपनी मुतवल्ली के रूप में नियुक्ति को वापस लिए जाने (Recall) की कार्यवाही को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता ने इससे पहले भी एक याचिका (Matters Under Article 227 No. 4403 of 2025) दायर की थी, जिसमें 1 अक्टूबर, 2024 के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसके द्वारा उनकी मुतवल्ली के रूप में नियुक्ति रद्द कर दी गई थी।
उक्त पूर्व याचिका का निस्तारण एकल न्यायाधीश (Single Judge) द्वारा 29 जुलाई, 2025 को किया गया था। उस आदेश में, एकल न्यायाधीश ने कहा था कि वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 83 में संशोधन के तहत, यदि ट्रिब्यूनल कार्यशील नहीं है, तो पीड़ित व्यक्ति सीधे हाईकोर्ट में अपील कर सकता है। तदनुसार, एकल न्यायाधीश ने अनुच्छेद 227 के तहत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था, लेकिन याचिकाकर्ता को “कानून के अनुसार, यदि सलाह दी जाए, तो अपील दायर करने” की स्वतंत्रता दी थी।
कोर्ट का विश्लेषण और निर्णय
वर्तमान मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ द्वारा की गई।
पूर्व के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, याचिकाकर्ता ने अपील करने के बजाय यह दूसरी रिट याचिका (Writ-C No. 12297 of 2025) दायर कर दी। 29 जुलाई, 2025 के आदेश का अवलोकन करने पर, खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता को पहले ही अपील दायर करने की विशिष्ट स्वतंत्रता दी जा चुकी थी।
इस पर कोर्ट ने कहा:
“हम इस रिट याचिका पर विचार करने के इच्छुक नहीं हैं, और तदनुसार, याचिकाकर्ता को 29 जुलाई, 2025 के आदेश के अनुसार कार्य करने की स्वतंत्रता देते हुए इसे निस्तारित करते हैं।”
ट्रिब्यूनल में रिक्तियों पर निर्देश
कार्यवाही के दौरान, कोर्ट को राज्य में वक्फ ट्रिब्यूनल की कार्यात्मक स्थिति के बारे में जानकारी दी गई। पीठ ने संज्ञान लिया कि वर्तमान में रिक्ति (Vacancy) के कारण ट्रिब्यूनल प्रभावी सुनवाई करने में असमर्थ है।
इस प्रशासनिक मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए, कोर्ट ने टिप्पणी की:
“हमें यह भी बताया गया है कि उत्तर प्रदेश राज्य में वक्फ ट्रिब्यूनल में रिक्ति है और इस कारण ट्रिब्यूनल के समक्ष कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हो पा रही है। इसके मद्देनजर, हम राज्य सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह इस मुद्दे को देखे और कानून के अनुसार वक्फ ट्रिब्यूनल में शीघ्र नियुक्ति करे।”
कोर्ट ने वरिष्ठ रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि इस आदेश को आवश्यक कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को सूचित किया जाए।
केस विवरण
केस शीर्षक: फैसल खान बनाम यू.पी. सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड जरिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी लखनऊ व 2 अन्य
केस संख्या: रिट-सी संख्या 12297, वर्ष 2025
कोरम: न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला
याचिकाकर्ता के वकील: फैसल अहमद खान
प्रतिवादी के वकील: मोहम्मद हमजा शमीम

