निजी शिकायत पर एसटीएफ द्वारा संज्ञान लेने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, एडीजी अमिताभ यश को किया तलब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक निजी शिकायत पर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा की गई जांच पर कड़ा रुख अपनाते हुए एसटीएफ के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) अमिताभ यश को शुक्रवार को व्यक्तिगत रूप से या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने का निर्देश दिया है।

यह निर्देश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकलपीठ ने उस याचिका की सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें याची जय चंद्र मौर्य ने सेवानिवृत्ति के बाद की पेंशन संबंधी सुविधाएं रोके जाने को चुनौती दी है। मौर्य प्रयागराज जिले के एक इंटरमीडिएट कॉलेज में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे।

मामले में शिकायतकर्ता तुलसी राम ने आरोप लगाया था कि मौर्य ने अपनी जन्मतिथि में गड़बड़ी की थी। इस शिकायत पर STF ने संज्ञान लेते हुए जांच शुरू की, और इसी रिपोर्ट के आधार पर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) ने मौर्य की पोस्ट-रिटायरल सुविधाएं रोकने का आदेश दिया।

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हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान ADG अमिताभ यश द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिए गए स्पष्टीकरण से न्यायालय असंतुष्ट रहा। साथ ही, राज्य सरकार की ओर से पेश अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता और अन्य अधिकारी यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि किस कानूनी प्रावधान के तहत STF किसी निजी शिकायत पर संज्ञान लेकर जांच कर सकती है।

इस पर न्यायालय ने टिप्पणी की:

“अगर मामला इतना गंभीर था, तो अब तक प्रबंधन समिति या जिला विद्यालय निरीक्षक ने याची के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?”

न्यायालय ने इस टिप्पणी के साथ आदर्श माध्यमिक विद्यालय, सरायपीठा शाहिपुर के प्रबंधक और प्रधानाचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए 16 जनवरी को संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से उपस्थित होने और याची की नियुक्ति से जुड़े सभी दस्तावेजों के साथ पेश होने का आदेश दिया है।

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साथ ही, न्यायालय ने मूल शिकायतकर्ता तुलसी राम को भी अगली सुनवाई की तारीख पर न्यायालय में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।

हालांकि, न्यायमूर्ति शमशेरी ने यह स्पष्ट किया कि यदि मौर्य की नियुक्ति में कोई भी भ्रम या धोखाधड़ी पाई जाती है, तो उन्हें इसके विधिक परिणाम भुगतने होंगे।

मामले की अगली सुनवाई 16 जनवरी, 2026 को होगी।

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