इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह यह स्पष्ट करे कि क्या महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत कार्यरत मजदूरों को न्यूनतम वेतन दिए जाने संबंधी कोई अधिसूचना जारी की गई है।
न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति ए.के. चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश 2023 में दाखिल एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया, जिसमें मांग की गई है कि मनरेगा के अंतर्गत काम कर रहे कृषि मजदूरों को न्यूनतम वेतन अधिनियम, 1948 के तहत तय दरों के अनुसार मजदूरी दी जाए।
अदालत ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार द्वारा न्यूनतम वेतन अधिनियम की धारा 3 के तहत कृषि मजदूरों के लिए जो वेतन तय किया गया है, वही मनरेगा श्रमिकों पर भी लागू होना चाहिए।
पीठ ने कहा, “यह सूचित किया गया है कि वर्तमान में राज्य में मनरेगा के तहत ₹230 प्रतिदिन की दर से मजदूरी दी जा रही है, जो कि अधिनियम, 1948 के तहत तय न्यूनतम वेतन से कम है। हालांकि, कृषि मजदूरों के लिए धारा 3 के अंतर्गत कोई अधिसूचना या निर्णय अभिलेख पर उपलब्ध नहीं है।”
कोर्ट ने इस संबंध में राज्य सरकार से स्पष्ट जानकारी मांगी है और अगली सुनवाई की तारीख 21 जनवरी तय की है।
यह मामला उत्तर प्रदेश में मनरेगा श्रमिकों के वेतन ढांचे पर दूरगामी असर डाल सकता है, जहां लाखों लोगों की आजीविका इस योजना पर निर्भर है।

