संभल हिंसा मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद आलम को दी अंतरिम अग्रिम जमानत, पुलिस फायरिंग के आरोपों पर यूपी सरकार से मांगा जवाब

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को संभल हिंसा मामले में आरोपी मोहम्मद आलम को अंतरिम अग्रिम जमानत दे दी और उत्तर प्रदेश सरकार से पुलिस फायरिंग के आरोपों पर जवाब मांगा है। यह आदेश ऐसे समय आया है जब कुछ दिन पहले संभल की एक अदालत ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।

न्यायमूर्ति जितेन्द्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने 25 फरवरी तक के लिए मोहम्मद आलम को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी। आलम पर नवंबर 2024 में संभल में हुई हिंसा के दौरान गंभीर धाराओं में केस दर्ज है, लेकिन उसके पिता यामीन की शिकायत पर CJM न्यायालय ने 9 जनवरी को उस समय के सर्किल ऑफिसर अनुज चौधरी सहित कुछ पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।

याचिका के अनुसार, 24 नवंबर 2024 को सुबह 8:45 बजे के करीब आलम जमामस्जिद, मोहल्ला कोट, संभल के पास अपनी ठेली पर बिस्कुट और रस्क बेच रहा था, जब नामजद पुलिस अधिकारियों ने भीड़ पर जान से मारने की नीयत से गोलीबारी शुरू कर दी।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि “सरकारी कर्तव्य” के नाम पर पुलिस अधिकारी आपराधिक कृत्यों से बच नहीं सकते। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति पर गोली चलाना ड्यूटी का हिस्सा नहीं हो सकता।

मोहम्मद आलम पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की निम्न धाराओं के तहत मामला दर्ज है:

  • धारा 191(3): घातक हथियारों के साथ दंगा
  • धारा 109(1): हत्या का प्रयास
  • धारा 121: लोक सेवक को चोट पहुँचाना
  • धारा 132: लोक सेवक पर हमला
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आलम के वकील ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वह निर्दोष है, प्रारंभिक FIR में उसका नाम भी नहीं था, और वह खुद पुलिस फायरिंग में घायल हुआ था, जिसका इलाज कराया गया। उन्होंने यह भी कहा कि आलम जांच में सहयोग करेगा और जब भी बुलाया जाएगा, जांच एजेंसियों के समक्ष पेश होगा।

राज्य सरकार के अधिवक्ता ने इन दावों का विरोध किया और कहा कि आलम को गोली नहीं लगी थी। उन्होंने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।

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दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद आलम को 25 फरवरी तक गिरफ्तारी से संरक्षण देते हुए यूपी सरकार को नोटिस जारी किया और जवाब मांगा है। अब मामले की अगली सुनवाई फरवरी के अंत में होगी।

इस बीच, CJM न्यायालय के आदेश पर नामजद पुलिस अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ेगी।

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