Allahabad HC का आदेश, जमानत आदेशों में आपराधिक इतिहास का भी जिक्र करें कोर्ट

Allahabad HC ने राज्य के अधीनस्थ अदालतों को आदेश दिया है कि वह किसी भी अपराधी के जमानत आदेशों पर उसके आपराधिक इतिहास का संपूर्ण ब्यौरा अवश्य दें।

यदि अभियुक्त का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नही है तो इसका भी उल्लेख करे। 

उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद जनपद के उदय प्रताप उर्फ दाऊ की जमानत याचिका खारिज करते हुए जस्टिस समित गोपाल ने कहा कि आपराधिक इतिहास जमानत अर्जी पर फैसला लेने का एकमात्र आधार नही हो सकता है

लेकिन आपराधिक इतिहास होने पर अभियुक्त को किसी गैरजमानती अपराध में जमानत पर रिहा करने या न करने का आधार बनता है।

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हाइकोर्ट इस आदेश की प्रति सभी जिला अदालतों को प्रेषित करने का निर्देश दिया है। 29 जनवरी 2021 तक इसकी अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

अभियुक्त उदय प्रताप ने अपनी जमानत याचिका में कहा था कि उसका कोई आपराधिक इतिहास नही है उस पर सिर्फ एक मुकदमा है। जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता द्वारा दी गई जानकारी से पता चला है कि अभियुक्त याची का आपराधिक इतिहास है। जिसका जिक्र अधीनस्थ न्यायालय ने उसकी जमानत अर्जी खारिज करते हुए अपने आदेश में नही किया है।

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