साइबर ब्लैकमेलिंग मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत खारिज की, मानसिक जांच के दिए आदेश

कौशांबी में एक किशोरी का मोबाइल हैक कर उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें हासिल करने और 5 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के आरोपी राहुल कुमार सरोज की जमानत अर्जी इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। इसके साथ ही अदालत ने स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे आरोपी की मानसिक स्थिति की व्यापक जांच करें।

मानसिक जांच और अदालती आदेश का ब्योरा

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल ने साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए अश्लील संदेशों और सोशल मीडिया पोस्ट का अवलोकन करने के बाद आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि ऑनलाइन भेजे गए संदेशों की भाषा और प्रकृति से ऐसा प्रतीत होता है कि आवेदक स्वस्थ दिमाग का व्यक्ति नहीं है। इस आधार पर जज ने कौशांबी जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) को आरोपी का औपचारिक मनोवैज्ञानिक परीक्षण कराने का निर्देश दिया और कहा कि जांच रिपोर्ट को संबंधित जिला अदालत के समक्ष रिकॉर्ड में रखा जाए।

फोन हैक करने और रंगदारी मांगने का आरोप

यह कानूनी कार्रवाई कौशांबी जिले के मंझनपुर थाने में दर्ज एक मामले से जुड़ी है। राहुल कुमार सरोज को एक शिकायत के आधार पर गिरफ्तार किया गया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसने गैरकानूनी तरीके से पीड़िता के मोबाइल फोन को एक्सेस करके उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो हासिल किए। पुलिस और मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए पीड़िता के बयानों के अनुसार, आरोपी ने इन संवेदनशील फोटो-वीडियो को इंटरनेट पर डालने की धमकी दी और इंस्टाग्राम पोस्ट व डायरेक्ट मैसेज के जरिए 5 लाख रुपये की मांग की।

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आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं, पोक्सो (POCSO) एक्ट की धारा 3 व 4 और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) एक्ट की धारा 66ई के तहत मामला दर्ज है।

बचाव और अभियोजन पक्ष की दलीलें

सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि उनका मुवक्किल पीड़िता के साथ व्यक्तिगत संबंध में था और शादी से इनकार करने के बाद उसे झूठे मामले में फंसाया गया है।

दूसरी ओर, सरकारी वकील ने जमानत याचिका का विरोध करते हुए आरोपी द्वारा पीड़िता और उसके परिजनों को भेजे गए संदेशों के रिकॉर्ड तथा सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर अपलोड की गई तस्वीरें कोर्ट के समक्ष पेश कीं। प्रस्तुत किए गए डिजिटल साक्ष्यों और अश्लील संदेशों की गंभीरता पर ध्यान देते हुए जस्टिस देशवाल ने 17 जुलाई के अपने आदेश में जमानत याचिका को खारिज कर दिया।

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