दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि पीड़िता का बयान स्वाभाविक, सीधा और पुख्ता है। पीड़िता की जिरह में उसके बयान पर हमला करने के लिए कुछ भी नहीं है। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता और न्यायमूर्ति मिनी पुष्कर्ण की पीठ सत्र मामले में एएसजे/विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) (पश्चिम दिल्ली) द्वारा आईपीसी की धारा 376/377 के तहत दर्ज
