फ्लैट की बालकनी की मरम्मत कौन कराएगा, मालिक या सोसाइटी? दिल्ली हाईकोर्ट ने 31 जनवरी तक विवाद सुलझाने का दिया आदेश

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फ्लैट की बालकनी की मरम्मत को लेकर मालिकों और हाउसिंग सोसाइटी के बीच चल रहे विवाद का निपटारा 31 जनवरी 2027 तक करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मरम्मत की जिम्मेदारी फ्लैट मालिक की है या सोसाइटी की, इसका फैसला मध्यस्थ (Arbitrator) करेगा।

जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की डिवीजन बेंच ने दिल्ली कोऑपरेटिव ट्रिब्यूनल के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजा गया था।

हाईकोर्ट ने सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (RCS) को 10 नवंबर 2026 तक मध्यस्थ नियुक्त करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाद लंबे समय से लंबित होने के कारण फ्लैट मालिकों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

बालकनी की मरम्मत को लेकर क्या है विवाद?

याचिकाकर्ता सुदीपा रॉय और एक अन्य व्यक्ति नव संसद कोऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड के सदस्य हैं। वे सोसाइटी में फ्लैट नंबर 461 के मालिक हैं।

याचिकाकर्ताओं का दावा था कि दिल्ली सहकारी समिति अधिनियम, 2003 और संबंधित नियमों के तहत फ्लैट के बाहरी ढांचे की देखरेख और मरम्मत करना सोसाइटी की जिम्मेदारी है।

हालांकि, उनका आरोप था कि सोसाइटी के पदाधिकारियों ने इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की।

याचिकाकर्ताओं ने तीन अन्य दावेदारों के साथ मिलकर अधिनियम की धारा 70 के तहत विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजने का अनुरोध किया था।

उन्होंने 15 मई 2025 के मांग पत्र वापस लेने, दिल्ली सहकारी समिति नियम, 2007 के नियम 94 के तहत दो महीने में बालकनी की मरम्मत कराने, धारा 37(1) के तहत प्रबंध समिति को हटाने और धारा 118(4) के तहत संबंधित पदाधिकारी तथा उनकी टीम को छह वर्षों तक चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की थी।

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ट्रिब्यूनल ने मध्यस्थता के लिए भेजा था मामला

सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार ने 2 सितंबर 2025 को दावा याचिका को सुनवाई योग्य नहीं मानते हुए खारिज कर दिया था।

इसके खिलाफ अपील पर दिल्ली कोऑपरेटिव ट्रिब्यूनल ने रजिस्ट्रार का आदेश रद्द कर विवाद मध्यस्थता के लिए भेज दिया।

ट्रिब्यूनल ने कहा था:

“अपीलकर्ता, जो संयुक्त सदस्य है, उसे भले ही मतदान का अधिकार न हो, लेकिन संयुक्त स्वामित्व वाले अपने फ्लैट के रखरखाव और सेवाओं की मांग करने का अधिकार निश्चित रूप से है।”

ट्रिब्यूनल ने मध्यस्थ को यह तय करने के लिए कहा था कि बालकनी का पुनर्निर्माण और उसके अंदरूनी हिस्से का रखरखाव फ्लैट मालिक की जिम्मेदारी है या सोसाइटी को अंदरूनी हिस्से का रखरखाव भी करना होगा।

सोसाइटी ने फ्लैट को किराये पर देने, बेचने और इस्तेमाल करने पर लगाई रोक

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता संख्या एक सुदीपा रॉय स्वयं उपस्थित हुईं।

उन्होंने बताया कि विवाद के कारण फ्लैट का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। सोसाइटी ने 26 दिसंबर 2025 को नोटिस जारी कर फ्लैट को किराये पर देने, बेचने या उसमें रहने पर रोक लगा दी थी।

नोटिस में फ्लैट की स्थिति को असुरक्षित और खतरनाक बताया गया था। इसमें कहा गया था कि सोसाइटी या उसकी प्रबंध समिति की पूर्व लिखित अनुमति के बिना फ्लैट में प्रवेश, निरीक्षण, बातचीत या उससे संबंधित किसी भी प्रकार के लेन-देन की अनुमति नहीं होगी।

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याचिकाकर्ता ने दलील दी कि बाहरी बालकनियों की मरम्मत सोसाइटी को करानी चाहिए, क्योंकि इसके लिए नीचे की मंजिलों की बालकनियों को भी मजबूत करना आवश्यक है।

उन्होंने कोर्ट को बताया कि फ्लैट की चार में से तीन बालकनियों की मरम्मत हो चुकी है। लेकिन रजिस्ट्रार और फिर ट्रिब्यूनल के समक्ष विवाद लंबित रहने के कारण फ्लैट का इस्तेमाल शुरू नहीं हो सका।

RCS की ओर से अधिवक्ता शशि प्रताप सिंह ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने मध्यस्थ नियुक्त करने का निर्देश दिया है और रजिस्ट्रार आवश्यक कार्रवाई करेगा।

विवाद के समाधान में देरी से फ्लैट मालिक परेशान: हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के फैसले को उचित पाया और उसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

बेंच ने कहा:

“यह स्पष्ट है कि दिल्ली कोऑपरेटिव ट्रिब्यूनल ने मामले में उचित दृष्टिकोण अपनाया है। वास्तव में याचिकाकर्ता की शिकायत विवाद के समाधान में हो रही देरी को लेकर है।”

कोर्ट ने आगे टिप्पणी की:

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“याचिकाकर्ता अपने फ्लैट का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है और सोसाइटी विरोधात्मक रुख अपना रही है।”

बेंच ने कहा कि 29 जुलाई 2026 के ट्रिब्यूनल आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। साथ ही कोर्ट ने स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता की कठिनाइयों को भी समझा जाना चाहिए।

31 जनवरी 2027 तक पूरे मामले का निपटारा करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार को 10 नवंबर 2026 तक मध्यस्थ नियुक्त करने का आदेश दिया।

मध्यस्थ को याचिकाकर्ताओं के सभी दावों और अंतरिम राहत की मांगों पर विचार करके 31 जनवरी 2027 तक पूरे विवाद का निपटारा करना होगा।

कोर्ट ने निर्देश दिया कि मध्यस्थ सोसाइटी को नोटिस जारी करके उसका पक्ष भी सुने।

इसके अलावा याचिकाकर्ताओं और RCS, दोनों को हाईकोर्ट के आदेश की प्रति सोसाइटी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया।

इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने रिट याचिका और लंबित आवेदनों का निपटारा कर दिया।

केस डिटेल्स

केस टाइटल: Sudipa Roy & Anr. v. Registrar of Co-operative Society & Anr.

केस नंबर: W.P.(C) 16066/2026 & CM APPL. 75086/2026

पीठ: जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट

आदेश की तारीख: 30 अक्टूबर 2026

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