यूपी में बड़ा न्यायिक फेरबदल, 57 न्यायिक अधिकारियों को नई तैनाती, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जारी की अधिसूचना

इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रशासन ने उत्तर प्रदेश में 57 न्यायिक अधिकारियों के तबादले और नई तैनाती के आदेश जारी किए हैं। इस फेरबदल में कई जिलों के प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी, विशेष न्यायाधीश और अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश शामिल हैं।

हाईकोर्ट के महानिबंधक मंजीत सिंह श्योरण की ओर से 23 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचनाओं के अनुसार, उच्चतर न्यायिक सेवा के 56 अधिकारियों की तैनाती और न्यायिक जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। इसके अलावा एक सिविल जज को ग्राम न्यायालय में न्यायाधिकारी नियुक्त किया गया है।

अधिकारियों को वर्तमान पद का कार्यभार छोड़कर नई तैनाती पर तत्काल कार्यभार संभालने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA), नई दिल्ली के निदेशक कुणाल वेपा को 31 अक्टूबर 2026 से वर्तमान पद का कार्यभार छोड़ने का निर्देश दिया गया है।

पारिवारिक न्यायालयों और मोटर दुर्घटना दावा अधिकरणों में बड़े बदलाव

जालौन (उरई) के प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह गौतम को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण पीलीभीत का पीठासीन अधिकारी बनाया गया है। अयोध्या के प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश राहुल कुमार कात्यायन को अमरोहा मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण और अयोध्या वाणिज्यिक न्यायालय के पीठासीन अधिकारी वेद प्रकाश वर्मा को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण लखनऊ (दक्षिण) में तैनाती दी गई है।

राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के निदेशक कुणाल वेपा को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण हापुड़ का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है।

ललितपुर के प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश नंद प्रताप ओझा को जालौन (उरई) का प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश बनाया गया है। मैनपुरी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी इंतखाब आलम को कानपुर नगर और औरैया मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी रजनीश कुमार-I को मुजफ्फरनगर का प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

फिरोजाबाद के प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश अरविंद कुमार सिंह-II को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण बुलंदशहर का पीठासीन अधिकारी बनाया गया है। मेरठ (उत्तर) मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी शैलेंद्र पांडेय को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण गोरखपुर का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है।

मुजफ्फरनगर के प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश खलीकुज्जमा को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण औरैया का पीठासीन अधिकारी और प्रयागराज (उत्तर) मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी परवेंद्र कुमार शर्मा को औरैया का प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश बनाया गया है।

श्रावस्ती (भींगा) के प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश आनंद कुमार-I को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण इटावा का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं, इटावा मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी राम चंद्र यादव-I को श्रावस्ती (भींगा) का प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश बनाया गया है।

झांसी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी मनराज सिंह को ललितपुर का प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश और फतेहपुर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी शिव चंद को कुशीनगर (पडरौना) मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है।

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अयोध्या और बाराबंकी में विशेष न्यायाधीशों की जिम्मेदारियां बदलीं

अयोध्या में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश इंद्रजीत सिंह-I को आवश्यक वस्तु अधिनियम के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। उनकी नियुक्ति प्रतिभा नारायण के स्थान पर हुई है, जिन्हें अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है।

जनार्दन प्रसाद यादव को एससी/एसटी एक्ट के तहत मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। इस पद पर तैनात दीपक यादव को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की जिम्मेदारी दी गई है।

अयोध्या के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र मोहन सहाय को जिले का प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

बाराबंकी में विनय आर्य को आवश्यक वस्तु अधिनियम के मामलों के लिए विशेष न्यायाधीश बनाया गया है। सुभाष चंद्र तिवारी को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

असद अहमद हाशमी को एससी/एसटी एक्ट के मामलों के लिए विशेष न्यायाधीश की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी जगह पहले तैनात राकेश कुमार सिंह-I को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है।

बाराबंकी के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनय कुमार सिंह-III को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण प्रयागराज (उत्तर) का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है।

पीलीभीत और आगरा में भी कई न्यायिक अधिकारियों की नई तैनाती

पीलीभीत में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) सुनील कुमार-II को महिलाओं के विरुद्ध अपराध से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली फास्ट ट्रैक कोर्ट की जिम्मेदारी दी गई है।

अनु सक्सेना को आवश्यक वस्तु अधिनियम के मामलों के लिए विशेष न्यायाधीश और शिखा प्रधान को एससी/एसटी एक्ट के मामलों के लिए विशेष न्यायाधीश बनाया गया है।

राम किशोर-IV को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। वहीं, पीलीभीत के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव को फिरोजाबाद का प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश बनाया गया है।

आगरा में विवेक कुमार-I को आवश्यक वस्तु अधिनियम के मामलों के लिए विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। पवन कुमार श्रीवास्तव को उत्तर प्रदेश डकैती प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1983 के तहत मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत की जिम्मेदारी दी गई है।

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विकास गोयल को एससी/एसटी एक्ट के मामलों के लिए विशेष न्यायाधीश और शिव कुमार-II को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

आगरा के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुष्कर उपाध्याय को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण मेरठ (उत्तर) का पीठासीन अधिकारी बनाया गया है।

बागपत, कानपुर नगर और फिरोजाबाद में बदली तैनाती

बागपत में शबिस्तान अकील को एससी/एसटी एक्ट के मामलों के लिए विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। विष्णु प्रसाद अग्रवाल को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की जिम्मेदारी दी गई है।

बागपत की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूनम राजपूत को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण मैनपुरी का पीठासीन अधिकारी बनाया गया है।

कानपुर नगर में निशा श्रीवास्तव को आवश्यक वस्तु अधिनियम के मामलों के लिए विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। देव कांत शुक्ल को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है।

कानपुर नगर की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सपना त्रिपाठी-I को गोंडा का प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

उत्तर प्रदेश राज्य विधि आयोग, लखनऊ के सचिव वीर भद्र को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण फतेहपुर का पीठासीन अधिकारी बनाया गया है।

आजमगढ़ के विशेष न्यायाधीश एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार शाही को बांदा का प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

फिरोजाबाद में अर्चना गुप्ता को एससी/एसटी एक्ट के मामलों के लिए विशेष न्यायाधीश और साक्षी शर्मा को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

फिरोजाबाद की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नीलू मोघा को पीलीभीत का प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश बनाया गया है।

लखीमपुर खीरी, झांसी और मुजफ्फरनगर में नई जिम्मेदारियां

लखीमपुर खीरी में अभिषेक कुमार श्रीवास्तव को आवश्यक वस्तु अधिनियम के मामलों के लिए विशेष न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। रेनू सिंह को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बनाया गया है।

मनोज कुमार सिंह-II को एससी/एसटी एक्ट के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष न्यायाधीश की जिम्मेदारी दी गई है। राजेश्वरी तोलिया को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।

लखीमपुर खीरी के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार दुबे-I को अयोध्या वाणिज्यिक न्यायालय का पीठासीन अधिकारी बनाया गया है।

मेरठ की अपर प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश मीता सिंह को मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण झांसी का पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है।

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जौनपुर के अपर प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश विमल प्रकाश आर्य को महाराजगंज के पारिवारिक न्यायालय में इसी पद पर स्थानांतरित किया गया है।

मुजफ्फरनगर में मंजुला भलोटिया को महिलाओं के विरुद्ध अपराध से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) नियुक्त किया गया है।

शिव कुमारी को 14वें वित्त आयोग के तहत गठित फास्ट ट्रैक कोर्ट में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की जिम्मेदारी दी गई है।

मुजफ्फरनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) रवि कुमार दिवाकर को इसी जिले का अपर प्रधान पारिवारिक न्यायाधीश बनाया गया है।

लखीमपुर खीरी के धौरहरा ग्राम न्यायालय में आकाश यादव की नियुक्ति

एक अलग अधिसूचना के जरिए हाईकोर्ट ने लखीमपुर खीरी के अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) आकाश यादव को धौरहरा तहसील स्थित ग्राम न्यायालय का न्यायाधिकारी नियुक्त किया है।

यह नियुक्ति राज्य सरकार की 22 अक्टूबर 2026 की अधिसूचना के तहत नवसृजित न्यायालय में की गई है।

नई तैनाती पर तत्काल कार्यभार संभालने के निर्देश

हाईकोर्ट प्रशासन ने संबंधित न्यायिक अधिकारियों को वर्तमान पद का कार्यभार छोड़कर नई तैनाती पर तत्काल कार्यभार संभालने का निर्देश दिया है। जहां पहले से जारी प्रशासनिक निर्देश लागू होते हैं, वहां उनके अनुसार कार्यभार ग्रहण करना होगा।

अधिकारियों को कार्यभार छोड़ने और ग्रहण करने के प्रमाणपत्र इलाहाबाद हाईकोर्ट के सहायक निबंधक (सेवाएं) को भौतिक रूप से और सेवा अनुभाग की आधिकारिक ईमेल आईडी पर भेजने होंगे। प्रमाणपत्रों में हाईकोर्ट द्वारा आवंटित व्यक्तिगत पहचान संख्या भी दर्ज करनी होगी।

अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि अपने अनुरोध पर स्थानांतरित या तैनात किए गए अधिकारी वित्तीय हस्तपुस्तिका के खंड-III, अध्याय-IV के नियम 42 के तहत यात्रा भत्ते के हकदार नहीं होंगे।

हाईकोर्ट ने 24 नवंबर 2021 के पूर्व प्रशासनिक निर्देशों का भी उल्लेख किया है। इनके अनुसार जिला एवं सत्र न्यायाधीशों तथा पारिवारिक न्यायालयों के प्रधान न्यायाधीशों को यह सुनिश्चित करना होगा कि पीठासीन अधिकारियों के स्थानांतरण से रिक्त होने वाली अदालतों में कोई मामला लंबित न रहे, जब तक किसी विशेष प्रावधान के तहत ऐसा करना प्रतिबंधित न हो।

इसके अलावा, स्थानांतरित पीठासीन अधिकारी के कार्यभार छोड़ने के बाद रिक्त अदालत से जुड़े कर्मचारियों को तत्काल अन्य अदालतों या प्रतिष्ठानों में स्थानांतरित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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