कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक बचाए गए स्ट्रीट डॉग की कस्टडी को लेकर दो महिलाओं के बीच चल रहे विवाद में आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी है। कोर्ट ने पाया कि कुत्ता पूरी तरह स्वस्थ है और उसकी उचित देखभाल की जा रही है। ऐसे में आपराधिक मुकदमा जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता महिला को महीने में एक बार कुत्ते से मिलने की अनुमति भी दी है।
जस्टिस चैताली चटर्जी दास ने 9 अक्टूबर को दिए आदेश में दोनों महिलाओं की पशुओं के प्रति संवेदनशीलता की सराहना की। कोर्ट ने कहा कि दोनों ने एक ऐसे बेजुबान जानवर की देखभाल और सुरक्षा के लिए प्रयास किए हैं, जो अपनी जरूरतों और तकलीफों को शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकता।
हाईकोर्ट ने पुलिस की रिपोर्ट, कुत्ते के मेडिकल रिकॉर्ड और उसकी हाल की तस्वीर देखने के बाद पाया कि वह अच्छी स्थिति में है। कोर्ट के अनुसार, ऐसा कोई कारण सामने नहीं आया जिसके आधार पर आपराधिक कार्यवाही आगे जारी रखी जाए।
कुत्ते को बचाने और गोद लेने को लेकर शुरू हुआ विवाद
यह मामला एक स्ट्रीट डॉग के बच्चे से जुड़ा है, जिसकी उम्र विवाद शुरू होने के समय लगभग छह से सात महीने थी।
याचिकाकर्ता महिला का कहना था कि उसने नवंबर 2024 में कुत्ते के बच्चे को खराब हालत में बचाया था। इसके बाद उसके इलाज की व्यवस्था की और लगातार उसकी देखभाल करती रही। महिला उसे बिना किसी पैसे के लेनदेन के स्थायी रूप से गोद लेना चाहती थी।
दूसरी महिला ने इस दावे का विरोध किया। उसका कहना था कि कुत्ते को सबसे पहले उसने बचाया था और उसकी अनुमति लिए बिना ही दूसरी महिला उसे अपने साथ ले गई। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि कुत्ते को गोद लेने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।
इस शिकायत के आधार पर आपराधिक कार्यवाही शुरू हुई। इसके बाद याचिकाकर्ता ने 2025 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए मुकदमा रद्द करने की मांग की।
कोर्ट के निर्देश पर हुई मुलाकात, पुलिस ने दी रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि विवाद शुरू हुए काफी समय बीत चुका है और उस समय छोटा पिल्ला अब लगभग दो साल का कुत्ता हो चुका है।
कुत्ता अब भी याचिकाकर्ता महिला के पास था। वहीं, शिकायतकर्ता महिला ने उससे मिलने और यह जानने की इच्छा जताई कि उसकी देखभाल ठीक से हो रही है या नहीं।
याचिकाकर्ता की सहमति मिलने पर हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता को एक निर्धारित तारीख और समय पर कुत्ते से मिलने की अनुमति दी। यह मुलाकात संबंधित पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी की मौजूदगी में कराई गई।
मुलाकात के बाद पुलिस ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की। इसमें बताया गया कि कुत्ता अच्छी स्थिति में है और उसके स्वास्थ्य या देखभाल को लेकर ऐसी कोई प्रतिकूल परिस्थिति नहीं मिली, जिसके कारण आपराधिक मुकदमा जारी रखना जरूरी हो।
हाईकोर्ट ने कुत्ते की मेडिकल रिपोर्ट और हाल की तस्वीर का भी परीक्षण किया। इन तथ्यों के आधार पर कोर्ट ने माना कि मामले में आगे आपराधिक कार्यवाही जारी रखने का कोई उचित कारण नहीं है।
दोनों महिलाओं की पशुओं के प्रति संवेदनशीलता की सराहना
जस्टिस चैताली चटर्जी दास ने कहा कि दोनों महिलाओं ने बेजुबान जानवर की सुरक्षा और देखभाल के प्रति अपनी जिम्मेदारी दिखाई है।
कोर्ट ने माना कि पशुओं के कल्याण के लिए दोनों महिलाओं के प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने ऐसे जीवों की मदद करने में योगदान दिया है, जो अपनी परेशानी खुद बता नहीं सकते।
हाईकोर्ट ने उम्मीद जताई कि दोनों महिलाएं आपसी विवाद को पीछे छोड़कर जरूरतमंद और बेजुबान जानवरों की भलाई के लिए मिलकर काम करेंगी।
आपराधिक केस रद्द, हर महीने मिलने की अनुमति
इन परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने कुत्ते की कस्टडी से जुड़े विवाद में लंबित पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द कर दी।
हालांकि, कोर्ट ने शिकायतकर्ता महिला की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए उसे महीने में एक बार कुत्ते से मिलने की अनुमति दी।
इसके लिए उसे कुत्ते की वर्तमान देखभाल कर रही महिला से पहले अनुमति लेनी होगी। साथ ही मुलाकात के दौरान ऐसी सभी शर्तों का पालन करना होगा, जिनसे कुत्ते के स्वास्थ्य और उसकी भलाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

