गुजरात हाईकोर्ट ने बुधवार को सूरत जिले में एक स्थानीय नेता की पुत्रवधू को खुदकुशी के लिए उकसाने की आरोपी महिला को नियमित जमानत दे दी है।
जस्टिस हसमुख डी. सुथार की अदालत ने 14 अक्टूबर को इशिका उर्फ रानी समीर बनर्जी की जमानत अर्जी मंजूर कर ली। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले की जांच काफी आगे बढ़ चुकी है, आरोपी से अब कुछ भी बरामद किया जाना बाकी नहीं है, उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में वक्त लगेगा।
कडोदरा निवासी 24 वर्षीय निधीकुमारी सिंह ने 23 अगस्त को कथित तौर पर खुदकुशी कर ली थी, जिसके बाद 26 अगस्त से ही बनर्जी न्यायिक हिरासत में जेल में बंद थी।
जमानत की शर्तें और कानूनी टिप्पणियां
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए बनर्जी को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही अदालत ने उस पर बिना निचली अदालत की अनुमति के गुजरात से बाहर जाने पर रोक लगा दी है और उसका पासपोर्ट जमा कराने का निर्देश दिया है। इसके अलावा, चार्जशीट दाखिल होने तक बनर्जी को हर हफ्ते और उसके बाद अगले छह महीने तक हर महीने संबंधित थाने में अपनी हाजिरी दर्ज करानी होगी।
अदालत ने दर्ज आरोपों पर गौर करते हुए कहा कि मृतका के पति के साथ आरोपी के कथित संबंध थे, जिसके कारण मृतका को पति द्वारा मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया। इसी वजह से मृतका ने सुसाइड नोट में आरोपी का नाम लिखकर जान दे दी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह जमानत के स्तर पर सबूतों के गुण-दोष की विस्तार से समीक्षा नहीं कर रहा है। अदालत ने निचली अदालत को निर्देश दिया कि वह मुकदमे की सुनवाई के दौरान इन शुरुआती टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना सबूतों का आकलन करे।
अदालत में दोनों पक्षों की दलीलें
राज्य सरकार ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध करते हुए तर्क दिया कि आरोपी एक गंभीर अपराध में शामिल है और उसने इस घटना में सक्रिय भूमिका निभाई है। दूसरी तरफ, बचाव पक्ष के वकील ने बनर्जी को निर्दोष बताते हुए कहा कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया है और पुलिस जांच का एक बड़ा हिस्सा पहले ही पूरा हो चुका है।
बनर्जी के खिलाफ कडोदरा जीआईडीसी थाने में खुदकुशी के लिए उकसाने, पति द्वारा क्रूरता करने और अपराध के समय मौजूद रहकर उकसाने से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज है। इससे पहले सितंबर में एक स्थानीय अदालत ने उसकी जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि सुसाइड नोट में उसका नाम दर्ज है और जांच दस्तावेजों में उसकी कथित संलिप्तता सामने आई है।
दर्ज शिकायत की पृष्ठभूमि
निधीकुमारी के भाई द्वारा दर्ज कराई गई पुलिस शिकायत के मुताबिक, निधीकुमारी की शादी साल 2024 में स्थानीय भाजपा नेता शशि सिंह के बेटे सौरभ सिंह के साथ हुई थी। दोनों कडोदरा में रहते थे, जहां सौरभ और बनर्जी के कथित संबंधों को लेकर पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता रहता था।
शिकायत में यह भी बताया गया कि खुदकुशी करने से कुछ ही देर पहले निधीकुमारी ने अपनी मां को फोन किया था और आशंका जताई थी कि उसका पति उसकी जान ले सकता है। इसके कुछ समय बाद ही परिवार को उसकी मौत की सूचना मिली। इन आरोपों के आधार पर पुलिस ने सौरभ और बनर्जी दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

