राजधानी में असली पनीर के नाम पर गैर-डेयरी और सिंथेटिक ‘एनालॉग पनीर’ बेचे जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और दिल्ली सरकार से उनका रुख स्पष्ट करने को कहा है।
एक्टिंग चीफ जस्टिस नितिन डब्ल्यू. सांब्रे और जस्टिस संजय सिंह की खंडपीठ ने बुधवार को रिद्धिमा सिंह और अवलोकितेश्वर पद्मपाणि सिद्धार्थ की संयुक्त याचिका पर औपचारिक नोटिस जारी किए। अदालत ने सभी उत्तरदाताओं को अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया है।
उपभोक्ताओं के साथ धोखा और पोषण संबंधी अंतर
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष उठाया कि खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत पनीर एक वैधानिक मानक डेयरी उत्पाद है। दूसरी ओर, गैर-डेयरी या एनालॉग उत्पादों में दूध के प्राकृतिक तत्वों के बजाय वनस्पति तेल (वेजिटेबल ऑयल) और वनस्पति फैट जैसे गैर-दूध अवयवों का उपयोग किया जाता है, जिसके कारण इनमें असली डेयरी जैसा पोषण नहीं होता।
याचिका में रेखांकित किया गया कि होटल, रेस्तरां या ढाबों में भोजन करने वाले आम उपभोक्ताओं के पास यह जानने का कोई व्यावहारिक तरीका नहीं होता कि उन्हें परोसी गई डिश असली पनीर से बनी है या किसी गैर-डेयरी विकल्प से। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यदि कोई ग्राहक पूरी जानकारी के साथ स्पष्ट लेबल वाला गैर-डेयरी विकल्प चुनता है, तो यह उसका व्यक्तिगत निर्णय है। लेकिन जो उपभोक्ता पनीर का आर्डर देता है, उसे कानूनी तौर पर तय मानकों के अनुरूप असली पनीर ही मिलना चाहिए, न कि बिना जानकारी के वनस्पति फैट से तैयार कोई विकल्प।
त्योहारी सीजन में सैंपलिंग पर हाईकोर्ट की टिप्पणी
त्योहारी सीजन के दौरान मांग में भारी उछाल का हवाला देते हुए याचिकाकर्ताओं ने अदालत से गुहार लगाई कि अधिकारियों को बाजार में बिकने वाले पनीर और पनीर के नाम पर बेचे जा रहे खाद्य पदार्थों की तत्काल सघन सैंपलिंग और लैब जांच कराने के निर्देश दिए जाएं।
इस मांग पर पीठ ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि नियामक संस्थाएं पहले से ही ऐसी निगरानी प्रक्रिया चला रही हैं। पीठ ने टिप्पणी की कि संबंधित विभाग यह जांच कर रहे हैं और इस अभियान से जुड़े आंकड़े अदालत के रिकॉर्ड पर पहले ही पेश किए जा चुके हैं।
रेस्टोरेंट-ढाबों के लिए अनिवार्य डिस्क्लोजर और रोक की मांग
याचिका में मांग की गई है कि दिल्ली में एनालॉग पनीर के उत्पादन, आपूर्ति, बिक्री और इसे परोसने पर रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य गैर-डेयरी पनीर के खिलाफ पहले ही सख्त कदम उठा चुके हैं।
इसके अलावा, याचिका में फूड सर्विस इंडस्ट्री के लिए सख्त प्रकटीकरण (डिस्क्लोजर) नियम लागू करने की मांग की गई है। इसके अनुसार होटल, रेस्तरां, क्लाउड किचन, कैटरर्स, भोजनालयों और ई-कॉमर्स फूड प्लेटफॉर्म्स के लिए यह अनिवार्य किया जाना चाहिए कि यदि वे अपने व्यंजनों में एनालॉग या गैर-डेयरी विकल्पों का उपयोग करते हैं, तो मेन्यू और बिलिंग में ग्राहकों को इसकी स्पष्ट व प्रमुखता से सूचना दें।

