सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे जगतार सिंह हवारा को दिल्ली की तिहाड़ जेल से पंजाब की किसी जेल में स्थानांतरित करने की मांग पर इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) से रिपोर्ट लेने का फैसला किया है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि इस मामले में पंजाब सरकार की सुरक्षा संबंधी आपत्तियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली दो जजों की बेंच ने कहा कि यह केवल हत्या का सामान्य मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक विशेष विचारधारा भी जुड़ी हुई है। पंजाब सरकार का कहना है कि उस विचारधारा का प्रभाव अब भी मौजूद है और हवारा के स्थानांतरण से राज्य में तनाव बढ़ सकता है।
कोर्ट ने कहा कि इन आशंकाओं की जांच जरूरी है। इसलिए आगे कोई फैसला लेने से पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो से जानकारी ली जाएगी।
पंजाब सरकार ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर जताई चिंता
पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर हवारा को राज्य की किसी जेल में भेजने का विरोध किया है।
सरकार ने कहा कि ऐसा करने से पंजाब में शांति, सांप्रदायिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। राज्य सरकार ने केंद्रीय और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आशंका जताई कि हवारा अपने सहयोगियों की मदद से जेल से भागने की कोशिश कर सकता है।
हलफनामे में मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर वर्ष 2023 से चल रहे प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया है। यहां प्रदर्शनकारी बंदी सिखों की रिहाई की मांग कर रहे हैं।
पंजाब सरकार के अनुसार, ऐसे माहौल में हवारा को राज्य की जेल में स्थानांतरित करने से कट्टरपंथी गतिविधियां बढ़ सकती हैं और सार्वजनिक अशांति पैदा हो सकती है।
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि कानून-व्यवस्था से जुड़े इन खतरों को देखते हुए हवारा को पंजाब की किसी भी जेल में स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं दी जाए।
82 वर्षीय मां से मिलने के लिए पंजाब जाना चाहता है हवारा
हवारा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने कोर्ट को बताया कि उनका मुवक्किल अपनी बुजुर्ग मां से मिलने के लिए पंजाब की जेल में स्थानांतरण चाहता है।
उन्होंने कहा कि हवारा की मां 82 वर्ष की हैं और वही उसके परिवार की एकमात्र जीवित करीबी सदस्य हैं। यदि हवारा को पंजाब की जेल में भेज दिया जाता है, तो उसकी मां वहां जाकर उससे मुलाकात कर सकेंगी।
गोंसाल्वेस ने हवारा के पिछले 31 वर्षों के आचरण का हवाला देते हुए भी उसके अनुरोध का समर्थन किया।
हालांकि, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि हवारा वर्ष 2005 में चंडीगढ़ जेल में सुरंग खोदकर फरार हो चुका है। उन्होंने कहा कि इस घटना के संबंध में उसे दोषी भी ठहराया गया था।
कैदी के अधिकारों के साथ समाज की सुरक्षा भी जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएम सुंदरेश ने कहा कि अदालतें अपराध की गंभीरता के बावजूद कैदियों को पैरोल देने पर विचार करती हैं, क्योंकि हर व्यक्ति के भविष्य में सुधार की संभावना होती है।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में समाज पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को भी देखना जरूरी है।
जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि अदालत को सावधानी बरतनी होगी ताकि किसी फैसले के कारण नई अशांति या तनाव पैदा न हो।
बेंच ने पंजाब सरकार की आपत्तियों और हवारा की व्यक्तिगत परिस्थितियों को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो से सुरक्षा संबंधी जानकारी प्राप्त करने का फैसला किया।
1995 में हुई थी पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या
पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय के प्रवेश द्वार पर हुए बम विस्फोट में मौत हो गई थी। इस घटना में 16 अन्य लोगों की भी जान गई थी।
इस मामले में वर्ष 2007 में सीबीआई की विशेष अदालत ने जगतार सिंह हवारा और बलवंत सिंह राजोआना को मौत की सजा सुनाई थी, जबकि तीन अन्य दोषियों को उम्रकैद की सजा दी गई थी।
बाद में अक्टूबर 2010 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हवारा की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।
हवारा वर्तमान में दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद है। पंजाब की जेल में स्थानांतरण की उसकी मांग पर सुप्रीम कोर्ट को अब इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट का इंतजार है।

