दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के नियमन की मांग: हाईकोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब, शुक्रवार को अगली सुनवाई

राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शनों को निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत विनियमित करने की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने को कहा है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और जस्टिस संजय शर्मा की पीठ ने केंद्र व अन्य संबंधित प्राधिकारियों के वकीलों को निर्देश दिया कि वे इस संबंध में जरूरी निर्देश हासिल कर अदालत को अवगत कराएं। पीठ ने मामले की तत्काल सुनवाई की अर्जी स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई शुक्रवार के लिए तय की है।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं को सुप्रीम कोर्ट में दायर प्रदर्शन-संबंधी याचिकाओं की प्रतियां भी रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया है। पीठ ने स्पष्ट किया कि वह ऐसे किसी पहलू पर सुनवाई आगे नहीं बढ़ाना चाहती जो पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने पीठ को अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट में इन मामलों की सुनवाई 15 अक्टूबर तक के लिए स्थगित हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुपालन पर जोर

याचिकाकर्ताओं—जिसमें व्यापारी, रेहड़ी-पटरी संचालक और वकील शामिल हैं—की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने दलील दी कि प्रदर्शनों के नियमन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले ही कई दिशा-निर्देश जारी कर चुका है, जिनका प्रशासन को अनिवार्य रूप से पालन करना चाहिए। इससे पहले वकील ऋषभ सक्सेना की याचिका पर वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया था, जिसे पीठ ने मंजूर कर लिया।

त्योहारी सीजन में 2,000 करोड़ के नुकसान की दलील

मध्य दिल्ली में चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दों को लेकर विभिन्न विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों द्वारा जून-जुलाई से लगातार बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

व्यापारियों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पोद्दार ने अदालत में रेखांकित किया कि अक्टूबर से फरवरी के बीच चलने वाला त्योहारी सीजन कारोबार के लिहाज से सबसे अहम समय होता है, जो इन विरोध प्रदर्शनों के चलते गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

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वहीं वरिष्ठ अधिवक्ता सचिन पुरी ने दलील दी कि हाल के दिनों में मध्य दिल्ली में सैकड़ों लोगों द्वारा किए गए प्रदर्शनों ने पूरे क्षेत्र की गतिविधियों को ठप कर दिया। उन्होंने अदालत को बताया कि व्यापक स्तर पर की गई बैरिकेडिंग और प्रदर्शनों की स्थिति के कारण व्यापारियों को अब तक करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है और कनॉट प्लेस जैसे प्रमुख वाणिज्यिक क्षेत्र तक आम जनता की पहुंच पूरी तरह बाधित हो गई है।

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