सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) से जुड़े दो कथित भर्ती घोटालों की नए सिरे से जांच कराने के कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में बदलाव किया। कोर्ट ने राज्य सरकार को विशेष जांच दल (SIT) के सदस्यों में बदलाव का प्रस्ताव देने की अनुमति दी है। साथ ही, SIT प्रमुख के चयन की जिम्मेदारी कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक (DGP) को सौंपी है।
जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने हाईकोर्ट के 21 सितंबर के उस निर्देश में भी बदलाव किया, जिसमें SIT को दोनों मामलों की शुरुआत से दोबारा जांच करने को कहा गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि 10 दिनों के भीतर SIT का गठन किया जाए। इसके बाद कर्नाटक हाईकोर्ट टीम की संरचना की समीक्षा करेगा।
नए निर्देश के अनुसार, राज्य के DGP अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) से कम रैंक के अधिकारी को SIT प्रमुख नियुक्त नहीं कर सकेंगे। राज्य सरकार को टीम के दो सदस्यों के स्थान पर दूसरे अधिकारियों के नाम सुझाने की भी छूट दी गई है।
SIT के गठन पर राज्य सरकार ने उठाए थे सवाल
कर्नाटक सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि दोनों मामलों की जांच पहले से ही अपराध जांच विभाग (CID) कर रहा था। जांच काफी आगे बढ़ चुकी थी और कई गिरफ्तारियां भी हो चुकी थीं। इसके बावजूद हाईकोर्ट ने जांच में कोई कमी बताए बिना नए सिरे से जांच का आदेश दे दिया।
सरकार ने SIT प्रमुख के रूप में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आलोक कुमार की नियुक्ति का विरोध किया था। राज्य ने उनके खिलाफ पहले हुई जांचों का हवाला दिया था।
इसके अलावा, SIT सदस्य डॉ. दिव्या गोपीनाथ की नियुक्ति पर भी आपत्ति जताई गई थी। वह राज्य की फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की प्रमुख हैं और सरकार ने उनकी नियुक्ति से हितों के टकराव की आशंका जताई थी।
हाईकोर्ट द्वारा गठित SIT में अनुप ए. शेट्टी, कुशल चौकसे और क्षमा मिश्रा भी शामिल थे।
इससे पहले 1 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 21 सितंबर के आदेश पर रोक लगा दी थी।
उस समय कोर्ट ने राज्य सरकार की इस दलील का संज्ञान लिया था कि मौजूदा जांच एजेंसी के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से जांच करने का कोई आरोप नहीं था। ऐसे में पूरी जांच दोबारा शुरू करने की आवश्यकता पर सवाल उठाया गया था।
किन दो भर्ती मामलों की हो रही जांच?
पहला मामला KPSC के जरिए पशु चिकित्सकों के 400 पदों पर भर्ती में कथित धांधली से जुड़ा है। इस मामले में KPSC के निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार भी आरोपियों में शामिल हैं।
दूसरा मामला साहूकार की बेटी की कर्नाटक के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में औद्योगिक विस्तार अधिकारी के पद पर नियुक्ति से संबंधित है।
आरोप है कि साहूकार की बेटी ने नियुक्ति के लिए फर्जी आय प्रमाणपत्र जमा किया था। इसमें परिवार की सालाना आय केवल 40,000 रुपये दिखाई गई थी, जिसके आधार पर उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के तहत नौकरी मिली।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने पहले इन मामलों की जांच CBI को सौंपने या CID के पास बनाए रखने के बजाय SIT गठित करने का आदेश दिया था।
वहीं, हाईकोर्ट में CBI जांच की मांग करने वाले ऑल कर्नाटक स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि CID साहूकार और KPSC के अन्य सदस्यों को गिरफ्तार करने में विफल रही थी।
CID और ED की जांच में हुईं गिरफ्तारियां
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने जुलाई के आखिरी सप्ताह में दोनों विवादित भर्ती मामलों की जांच CID को सौंप दी थी।
पशु चिकित्सकों की भर्ती में कथित घोटाले की जांच के दौरान CID ने KPSC के पूर्व परीक्षा नियंत्रक और 41 वर्षीय IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार को गिरफ्तार किया था।
गंगवार पर आरोप है कि उन्होंने बसवराज कन्नाले नामक बिचौलिए के जरिए लगभग 20 अभ्यर्थियों तक परीक्षा के प्रश्न पहुंचाए थे। कन्नाले के BJP से संबंध बताए गए हैं।
यह मामला 9 जनवरी 2026 को आयोजित पशु चिकित्सकों की भर्ती परीक्षा से संबंधित है।
इसके बाद 6 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने KPSC के निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार और आयोग की सदस्य बी. वी. गीता को गिरफ्तार किया था।
दोनों पर आरोप है कि उन्होंने रिश्वत के बदले पशु चिकित्सकों की भर्ती परीक्षा की उत्तर कुंजी छह अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराई थी।
अब सुप्रीम कोर्ट के संशोधित निर्देशों के अनुसार SIT का गठन किया जाएगा। इसके गठन के बाद कर्नाटक हाईकोर्ट टीम के सदस्यों और उसकी संरचना पर विचार करेगा।

