केरल हाईकोर्ट ने एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को लिंग परिवर्तन सर्जरी (सेक्स रीअसाइनमेंट सर्जरी) के बाद देखभाल व उपचार के लिए मिलने वाली बकाया 21,000 रुपये की वित्तीय सहायता दो महीने के भीतर जारी करने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य के सामाजिक न्याय निदेशालय को आदेश दिया कि फैसले की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के बाद इस राशि का भुगतान जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जाए।
जस्टिस पी. वी. कुन्हीकृष्णन ने यह निर्देश याचिकाकर्ता द्वारा दायर रिट याचिका का निस्तारण करते हुए 8 अक्टूबर को दिया। याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार की कल्याणकारी योजना के तहत कुल 36,000 रुपये की वित्तीय मदद के लिए आवेदन किया था, जिसमें से उसे 15,000 रुपये का प्रारंभिक भुगतान ही मिल सका था। शेष राशि न मिलने पर उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
प्रशासनिक स्तर पर मंजूरी का इंतजार
सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने हाईकोर्ट को अवगत कराया कि बकाया राशि के भुगतान के लिए प्रशासनिक स्तर पर कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि संबंधित प्राधिकारी से आवश्यक वित्तीय व प्रशासनिक मंजूरी मिलने का इंतजार किया जा रहा है, जिसके मिलते ही राशि जारी कर दी जाएगी।
अदालत ने सरकार के इस पक्ष को रिकॉर्ड पर लिया और सामाजिक न्याय निदेशालय के निदेशक को निर्देशित किया कि याचिकाकर्ता की पात्र बकाया राशि 21,000 रुपये का भुगतान किसी भी स्थिति में दो महीने के भीतर कर दिया जाए। याचिकाकर्ता ने बकाया राशि पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिलाने का भी अनुरोध किया था, हालांकि हाईकोर्ट ने ब्याज की इस मांग को स्वीकार नहीं किया।
मामले की पृष्ठभूमि और आदेश का दायरा
याचिका में दर्ज विवरण के अनुसार, याचिकाकर्ता ने वित्तीय सहायता के लिए राज्य सरकार के पोर्टल पर 1 सितंबर 2025 को ऑनलाइन आवेदन जमा किया था। इसके बाद इसी वर्ष 11 सितंबर को संबंधित अधिकारियों के समक्ष एक औपचारिक प्रतिवेदन भी प्रस्तुत किया गया था। आदेश में इस बात का ब्योरा नहीं है कि भुगतान में देरी की प्रशासनिक वजह क्या रही या विभाग ने आवेदन पर किस तरह प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
हाईकोर्ट का यह आदेश पूरी तरह से याचिकाकर्ता के व्यक्तिगत मामले तक ही सीमित है। अदालत ने राज्य भर में लंबित ऐसे अन्य आवेदनों के लिए कोई सामान्य समयसीमा तय नहीं की है और न ही ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए वित्तीय सहायता से जुड़ी किसी नई नीतिगत व्यवस्था की घोषणा की है।
इस याचिका में सामाजिक न्याय विभाग, सामाजिक न्याय निदेशालय के निदेशक, केरल स्टेट ट्रांसजेंडर बोर्ड और निदेशालय के अधीन संचालित ट्रांसजेंडर सेल को प्रतिवादी बनाया गया था। मामले की सुनवाई के दौरान सर्जरी से जुड़े मेडिकल प्रमाण पत्र, याचिकाकर्ता का ट्रांसजेंडर पहचान पत्र तथा वित्तीय सहायता से संबंधित 14 नवंबर 2018 और 22 अगस्त 2023 के सरकारी आदेश रिकॉर्ड पर प्रस्तुत किए गए थे।

