उपभोक्ता आयोग ने रद्द किए गए बस टिकट की रकम वापस नहीं करने को सेवा में कमी मानते हुए कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) को यात्री के 975 रुपये लौटाने का आदेश दिया है। आयोग ने निगम को मुआवजा और मुकदमे का खर्च भी देने का निर्देश दिया।
आयोग ने पाया कि KSRTC यात्री के खाते में टिकट की रकम वापस किए जाने का कोई दस्तावेजी सबूत पेश नहीं कर सका। निगम ने एक ही यात्रा के लिए दो टिकटों के बदले कुल 1,950 रुपये लेने की बात स्वीकार की थी, लेकिन यह साबित नहीं कर पाया कि रद्द टिकट के 975 रुपये यात्री को लौटाए गए थे।
क्या था पूरा मामला?
शिकायतकर्ता कर्नाटक में शिक्षक हैं। उन्होंने 1 अक्टूबर 2022 को सिंधनूर से मैंगलोर जाने के लिए KSRTC की बस में टिकट बुक किया था।
पहले टिकट के लिए उन्होंने 975 रुपये का भुगतान किया। हालांकि, बर्थ कन्फर्म नहीं होने के कारण उन्होंने उसी यात्रा के लिए दूसरा टिकट बुक किया और फिर से 975 रुपये चुकाए। इस तरह दोनों टिकटों पर कुल 1,950 रुपये खर्च हुए।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्होंने यात्रा से पहले एक टिकट रद्द करने की सूचना निगम को दी थी। उन्हें बताया गया था कि टिकट की पूरी रकम वापस कर दी जाएगी, लेकिन भुगतान नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि KSRTC ने निर्धारित यात्रा रद्द कर दी और उन्हें कोई वैकल्पिक टिकट उपलब्ध नहीं कराया। इसके चलते उन्हें 1 अक्टूबर 2022 को यात्रा करने के लिए दूसरी बस कंपनी से टिकट लेना पड़ा।
KSRTC ने आरोपों से किया इनकार
मामले में KSRTC ने शिकायतकर्ता के आरोपों को गलत बताया। निगम ने दलील दी कि यात्री ने बस में सीट बुक कराई थी, लेकिन निर्धारित समय पर यात्रा के लिए नहीं पहुंचे।
निगम के अनुसार, बस कंडक्टर ने यात्री के मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
KSRTC ने शिकायत की वैधता पर भी सवाल उठाया। निगम का कहना था कि शिकायतकर्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत उपभोक्ता की श्रेणी में नहीं आते और इसलिए मुआवजा पाने के हकदार नहीं हैं।
रिफंड देने का सबूत पेश नहीं कर सका निगम
मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि KSRTC ने एक ही यात्रा के लिए दो टिकटों के बदले 975-975 रुपये लेने की बात स्वीकार की थी।
आयोग ने यह भी पाया कि शिकायतकर्ता ने यात्रा की निर्धारित तारीख से पहले एक टिकट रद्द करने की सूचना दी थी। इसके बावजूद निगम ने टिकट की रकम वापस नहीं की।
आयोग के सामने KSRTC ऐसा कोई बैंक रिकॉर्ड या अन्य दस्तावेज पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो कि 975 रुपये शिकायतकर्ता के खाते में जमा किए गए थे।
आयोग ने माना कि केवल रिफंड देने का दावा करना पर्याप्त नहीं है। रकम लौटाने के दावे के समर्थन में दस्तावेजी सबूत होना जरूरी है।
आयोग ने रिफंड और मुआवजे का दिया आदेश
आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि रद्द टिकट की रकम वापस नहीं करना सेवा में कमी है।
इसके आधार पर आयोग ने KSRTC को शिकायतकर्ता के 975 रुपये लौटाने के साथ मुआवजा और मुकदमे का खर्च देने का निर्देश दिया।

