नेशनल हेराल्ड केस: अटैच संपत्तियों पर यथास्थिति बरकरार रखने की ईडी की अर्जी दिल्ली हाईकोर्ट में खारिज

नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों से जुड़ी कुर्क (अटैच) संपत्तियों पर यथास्थिति बनाए रखने की एजेंसी की अंतरिम अर्जी को खारिज कर दिया है।

जस्टिस सचिन दत्ता की बेंच ने सोमवार को साफ किया कि वह इस मामले में कोई अंतरिम निर्देश जारी नहीं करेंगे। अदालत ने कहा कि फिलहाल आरोपियों के खिलाफ कोई मामला लंबित नहीं है, इसलिए वह निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली मुख्य याचिका पर अंतिम सुनवाई कर ही अपना फैसला सुनाएगी। मामले की अगली सुनवाई अब नवंबर में होगी।

निचली अदालत के आदेश पर संपत्तियां छुड़ाने की दलील खारिज

अदालत में ईडी का पक्ष रख रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एस वी राजू ने संपत्तियों पर तुरंत यथास्थिति बरकरार रखने की गुहार लगाई थी। उन्होंने कहा कि ट्रायल कोर्ट के फैसले के आधार पर आरोपी अब ट्रिब्यूनल का रुख कर संपत्तियों को मुक्त कराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने दलील दी कि जब तक हाईकोर्ट इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं कर लेता, तब तक संपत्तियों को जस का तस रखा जाए।

जस्टिस सचिन दत्ता ने ईडी की इस मांग को नामंजूर करते हुए दोहराया कि अदालत अंतरिम आदेश नहीं देगी और याचिका पर अंतिम बहस के बाद ही फैसला होगा।

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निजी शिकायत और एफआईआर पर कानूनी टकराव

यह विवाद दरअसल राउज एवेन्यू कोर्ट (ट्रायल कोर्ट) के 16 दिसंबर के उस फैसले से शुरू हुआ है, जिसमें एजेंसी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था। निचली अदालत का कहना था कि चूंकि यह पूरा मामला पुलिस एफआईआर पर आधारित नहीं है, इसलिए कानूनन ईडी की शिकायत पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता।

इसके बाद 22 दिसंबर 2025 को हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश पर रोक लगाने की मांग और मुख्य याचिका पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, सुनील भंडारी, यंग इंडियन और डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड को नोटिस जारी किए थे।

हाईकोर्ट में दायर अपनी अर्जी में जांच एजेंसी ने कहा है कि निचली अदालत ने अपराध से अर्जित संपत्ति और मुख्य अपराध (शेड्यूल्ड ऑफेंस) की मौजूदगी के बावजूद बेहद तकनीकी आधारों पर चार्जशीट खारिज कर दी। एएसजी राजू ने तर्क दिया कि कानून पुलिस केस और निजी शिकायत में कोई भेद नहीं करता और निजी शिकायत पर भी प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत जांच जारी रह सकती है। उन्होंने याद दिलाया कि भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की निजी शिकायत पर मजिस्ट्रेट अदालत पहले ही मुख्य अपराध पर संज्ञान ले चुकी है। एजेंसी ने कहा कि निचली अदालत का रुख स्वीकार करने से मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों को सिर्फ इसलिए छूट मिल जाएगी क्योंकि अपराध की शिकायत किसी नागरिक ने मजिस्ट्रेट से की थी, न कि पुलिस एफआईआर से।

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दूसरी तरफ गांधी परिवार ने ईडी की याचिका को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया है। सोनिया और राहुल गांधी का कहना है कि निचली अदालत का फैसला पूरी तरह कानूनी, तार्किक और अधिकार क्षेत्र के अनुरूप है, जिसमें किसी भी तरह की प्रक्रियागत खामी नहीं है।

2000 करोड़ की संपत्ति और 752 करोड़ की जब्ती का मामला

ईडी की यह जांच नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन करने वाली कंपनी एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की संपत्तियों के कथित धोखाधड़ी भरे अधिग्रहण से जुड़ी है। एजेंसी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, दिवंगत कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा व ऑस्कर फर्नांडिस के साथ-साथ सुमन दुबे, सैम पित्रोदा और ‘यंग इंडियन’ पर साजिश रचने का आरोप लगाया है।

एजेंसी का दावा है कि एजेएल के पास लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां थीं। आरोप है कि यंग इंडियन कंपनी, जिसमें सोनिया और राहुल गांधी की 76 फीसदी हिस्सेदारी है, ने महज 90 करोड़ रुपये के कर्ज के बदले इन संपत्तियों पर धोखाधड़ी से नियंत्रण हासिल कर लिया। इसी जांच के तहत ईडी ने एजेएल और उससे जुड़ी संस्थाओं की करीब 752 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों और इक्विटी शेयरों को प्रोविजनली अटैच कर रखा है।

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