रिलायंस इंडस्ट्रीज के ट्रेडमार्क ‘जियो’ का अवैध इस्तेमाल कर लॉटरी और ऑनलाइन गेमिंग चलाने वाली 126 वेबसाइटों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने इन सभी प्लेटफॉर्मों को फर्जी (रोग) वेबसाइट करार देते हुए उनके संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी है। साथ ही संबंधित अधिकारियों और डोमेन रजिस्ट्रार को निर्देश दिया है कि वे ऐसी वेबसाइटों को तुरंत हटाएं और निलंबित करें।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 7 अक्टूबर को यह आदेश जारी किया। अदालत ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट किया कि किसी भी प्लेटफॉर्म को ‘रोग वेबसाइट’ की श्रेणी में रखने की असली कसौटी केवल संख्यात्मक पैमाना नहीं है, बल्कि उसके आचरण और प्रकृति का गुणात्मक मूल्यांकन (क्वालिटेटिव अप्रोच) ही इसका आधार होना चाहिए।
अंतरिम आदेश के तहत इन वेबसाइटों और इनके संचालकों पर ‘जियो’, ‘जियो लॉटरी’, ‘जियो लॉटरी गेम’ या इससे मिलते-जुलते किसी भी भ्रामक नाम से डोमेन पंजीकृत करने, उनका संचालन करने, प्रचार-प्रसार करने या किसी भी रूप में उनके उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। जस्टिस कौरव ने डोमेन नेम रजिस्ट्रार को भी स्पष्ट निर्देश दिया कि वे विवादित वेबसाइटों से जुड़े मुख्य खातों और उनकी सेवाओं को अगले आदेश तक अंतरिम रूप से निलंबित रखें।
ब्रांड की साख और जनता को धोखे से बचाने की दलील
अदालत में यह मामला रिलायंस इंडस्ट्रीज की उस शिकायत के बाद पहुंचा, जिसमें कंपनी ने पाया कि 126 वेबसाइटें बिना किसी अनुमति के उसके बौद्धिक संपदा अधिकारों का दुरुपयोग कर रही थीं। कंपनी ने बताया कि ये बाहरी संस्थाएं रिलायंस के पंजीकृत ट्रेडमार्क की आड़ में लॉटरी, गेमिंग, भुगतान और उससे जुड़ी अन्य सेवाएं दे रही थीं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की ओर से पेश वकील अंकित साहनी, चिराग अहलूवालिया और मोहित ने दलील दी कि ‘जियो’ ट्रेडमार्क और उससे जुड़े नामों पर कंपनी का विशेष वैधानिक और कॉमन लॉ अधिकार है। वकीलों ने कहा कि फर्जी प्लेटफॉर्मों द्वारा मिलते-जुलते नामों का इस्तेमाल करने से आम जनता में भ्रम पैदा होता है, कंपनी के स्थापित ब्रांड की छवि को नुकसान पहुंचता है और उसे व्यावसायिक क्षति होती है, इसलिए इन वेबसाइटों को तत्काल ब्लॉक किया जाना चाहिए।
अदालत के सामने रखी गईं विवादित वेबसाइटें
याचिका के अनुसार, इन वेबसाइटों ने रिलायंस के पंजीकृत और लोकप्रिय ट्रेडमार्क ‘जियो’ को अपने मुख्य और प्रमुख नाम के तौर पर अवैध रूप से शामिल किया हुआ था। अदालत में पेश की गई विवादित वेबसाइटों में मुख्य रूप से www.jiolotteryi.com, http://www.jiolotterylogin.com, http://www.jiolotterygame.com, http://www.jiolottery.club और http://www.jiolottery.store शामिल हैं।
कंपनी के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि ये प्लेटफॉर्म लॉटरी और उससे जुड़ी डिजिटल सेवाओं के लिए रिलायंस के ट्रेडमार्क की हूबहू नकल कर रहे थे। मामले की अगली सुनवाई तक इन वेबसाइटों और उनके डोमेन खातों पर निलंबन का अंतरिम आदेश प्रभावी रहेगा।

