छत्तीसगढ़ के सूरजपुर की एक सेशन कोर्ट ने पुलिसकर्मी की पत्नी से गैंगरेप और उसकी 12 साल की बेटी समेत दोनों की हत्या के मामले में तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपराध की क्रूरता, दोषियों के व्यवहार और उनके सुधरने की संभावना नहीं होने को देखते हुए मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी दुर्लभतम श्रेणी का अपराध माना।
अपर सत्र न्यायाधीश आनंद प्रकाश वरियाल ने कुलदीप साहू, फूल सिंह और चंद्रकांत चौधरी को मौत की सजा सुनाते हुए कहा कि जिस बेरहमी से दोनों की हत्या की गई, उसे देखते हुए उम्रकैद की सजा पर्याप्त नहीं होगी।
कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि मृतकों में एक 12 साल की मासूम बच्ची थी, जिसकी जिंदगी अभी शुरू ही हुई थी। दोनों पीड़िताएं निहत्थी थीं और तीनों हमलावरों का मुकाबला करने की स्थिति में नहीं थीं।
अपराध की क्रूरता ने समाज की अंतरात्मा को झकझोरा: कोर्ट
सजा पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि दोषियों ने दोनों पीड़िताओं के साथ बेहद अमानवीय व्यवहार किया। उन्हें गंभीर यातनाएं दी गईं और फिर बेरहमी से उनकी हत्या कर दी गई।
कोर्ट के मुताबिक, दोनों पीड़िताओं ने दोषियों को किसी तरह से उकसाया भी नहीं था। इसके बावजूद तीनों ने जानबूझकर इतनी क्रूरता से अपराध किया कि इससे न केवल न्यायिक अंतरात्मा, बल्कि पूरे समाज की अंतरात्मा भी झकझोर गई।
कोर्ट ने यह भी माना कि महिला के साथ गैंगरेप और हत्या के पीछे केवल यौन इच्छा पूरी करने का उद्देश्य नहीं था।
जज ने कहा कि मुख्य दोषी कुलदीप साहू ने अपना अहंकार संतुष्ट करने, पुलिसकर्मियों को सबक सिखाने या महिला के पति से बदला लेने के इरादे से इस वारदात को अंजाम दिया।
कोर्ट ने पाया कि अपराध की गंभीरता और उसे अंजाम देने के तरीके को देखते हुए दोषियों को उम्रकैद देने का विकल्प स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मुख्य दोषी के खिलाफ 22 से अधिक आपराधिक मामले
सजा तय करते समय कोर्ट ने कुलदीप साहू के आपराधिक इतिहास को भी महत्वपूर्ण माना।
कोर्ट के अनुसार, कुलदीप साहू एक आदतन अपराधी है। उसने वर्ष 2015 में नाबालिग रहते हुए पहला अपराध किया था। इसके बाद करीब 11 वर्षों में वह 22 से अधिक आपराधिक मामलों में शामिल रहा।
कोर्ट ने कहा कि दोषियों के खिलाफ एक ही दिन में पुलिस अधिकारियों या उनके परिवार के सदस्यों से जुड़े तीन आपराधिक मामले सामने आए थे। इससे पता चलता है कि उन्हें कानून और कानूनी कार्रवाई का कोई डर नहीं था।
जज ने दोषसिद्धि के बाद कोर्ट के बाहर मीडिया के सामने कुलदीप साहू के मुस्कुराने के व्यवहार का भी उल्लेख किया।
कोर्ट ने कहा कि उसके इस रवैये से ऐसा प्रतीत होता है कि पिछले अनुभवों के कारण उसे भरोसा था कि मुकदमा चलने या दोषी ठहराए जाने के बावजूद अंततः उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा।
तीनों दोषियों की प्रोबेशन रिपोर्ट और अन्य तथ्यों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि कुलदीप साहू, फूल सिंह और चंद्रकांत चौधरी के सुधरने की कोई संभावना नहीं है।
हत्या के बाद लोगों में भारी आक्रोश, दोषी का घर जलाया गया
फैसले में कोर्ट ने वारदात के बाद स्थानीय लोगों में पैदा हुए गुस्से का भी जिक्र किया।
कोर्ट ने बताया कि घटना के बाद आक्रोशित लोगों ने मुख्य दोषी का घर जला दिया था।
फैसले के दिन भी समाज के विभिन्न वर्गों से सैकड़ों लोग जिला कोर्ट के अंदर और बाहर जमा हुए थे।
इनमें से कुछ लोग दोषी को उनके हवाले करने की मांग करते हुए नारे लगा रहे थे, ताकि वे स्वयं उसे सजा दे सकें।
कोर्ट ने इन घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अपराध को लेकर समाज में भारी आक्रोश था।
घर में मिले थे खून के निशान, पत्नी और बेटी थीं लापता
अभियोजन के अनुसार, मामला वर्ष 2024 का है। एक पुलिसकर्मी की पत्नी और नाबालिग बेटी अचानक घर से लापता हो गई थीं।
घटना की रात पुलिसकर्मी ने अपनी पत्नी को फोन करने की कोशिश की, लेकिन उसका मोबाइल बंद मिला।
जब वह रात करीब 11:55 बजे घर पहुंचा तो बाहर का गेट खुला हुआ था। सीढ़ियों से लेकर रसोई तक खून के निशान दिखाई दे रहे थे, जबकि उसकी पत्नी और बेटी घर में नहीं थीं।
पुलिसकर्मी ने कुलदीप साहू पर संदेह जताया। उसके मुताबिक, उसी दिन पहले जिला बदर आदेश के उल्लंघन से जुड़े मामले में पुलिस अधिकारी से बातचीत के दौरान कुलदीप ने अपनी कार से पुलिसकर्मियों को कुचलने की कोशिश की थी।
शिकायतकर्ता को आशंका थी कि इसी घटना का बदला लेने के लिए उसकी पत्नी और बेटी को निशाना बनाया गया।
शुरुआत में दोनों के लापता होने के संबंध में एफआईआर दर्ज की गई।
अगले दिन पुलिस को पास के एक गांव में दो अज्ञात शव मिलने की सूचना मिली। शिकायतकर्ता ने शवों की पहचान अपनी पत्नी और बेटी के रूप में की।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि दोनों की मौत हत्या के कारण हुई थी।
साजिश रचकर घर में घुसने और सबूत मिटाने का आरोप
अभियोजन पक्ष के अनुसार, कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू, चंद्रकांत चौधरी और आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी ने मिलकर अपराध की साजिश रची थी।
आरोप था कि अभियुक्त जबरन घर में घुसे, पीड़िताओं के साथ यौन हिंसा की और उन्हें गंभीर चोटें पहुंचाकर उनकी हत्या कर दी।
अभियोजन ने यह भी आरोप लगाया कि वारदात के बाद कुलदीप साहू और अन्य आरोपियों ने सबूत छिपाने या नष्ट करने की कोशिश की।
मामले की सुनवाई के बाद सूरजपुर कोर्ट ने कुलदीप साहू, फूल सिंह और चंद्रकांत चौधरी को मौत की सजा सुनाई।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अपराध की असाधारण क्रूरता, पीड़िताओं की असहाय स्थिति, दोषियों का आपराधिक व्यवहार और उनके सुधरने की संभावना नहीं होने के कारण यह मामला दुर्लभतम श्रेणी में आता है।

