सड़क परियोजनाओं के लिए प्रतिपूरक वनीकरण: सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से मांगा जमीन का प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के लिए रास्ता साफ करते हुए राज्य सरकार को प्रतिपूरक वनीकरण के लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध कराने का विस्तृत प्रस्ताव पेश करने का निर्देश दिया है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने पंजाब सरकार से इस संबंध में जवाब तलब किया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान राज्य में लगातार सिमटते वन क्षेत्र और वनीकरण योजनाओं के लचर क्रियान्वयन पर गहरी चिंता जताई। पीठ ने एनएचएआई को निर्देश दिया कि वह अपनी याचिका की एक प्रति पंजाब सरकार को सौंपे, ताकि राज्य प्रशासन इस पर अपना औपचारिक पक्ष रख सके।

रणनीतिक महत्व की परियोजनाएं अटकीं: सॉलिसिटर जनरल

एनएचएआई का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट द्वारा पेड़ काटने पर लगाई गई निरंतर रोक के कारण सार्वजनिक महत्व की सड़क परियोजनाओं का काम रुक गया है। उन्होंने दलील दी कि इस तरह अनिश्चितकालीन रोक जारी नहीं रह सकती। कानून के तहत पेड़ काटने की स्थिति में प्रतिपूरक वनीकरण अनिवार्य वैधानिक दायित्व है और प्राधिकरण इसका पालन करने के लिए बाध्य है।

सॉलिसिटर जनरल ने यह भी रेखांकित किया कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है और यहां कुछ सड़कों का निर्माण रणनीतिक तथा रक्षा उद्देश्यों के लिए अत्यंत आवश्यक है। जब पीठ ने सवाल किया कि क्या पेड़ काटने वाले स्थान से पांच किलोमीटर के दायरे में ही वनीकरण के लिए जमीन आवंटित की जाती है, तो मेहता ने बताया कि कभी जमीन आवंटित हो पाती है और कभी नहीं। कई बार पांच किलोमीटर के दायरे में जमीन उपलब्ध करा पाना संभव नहीं होता, लेकिन इसके बावजूद पेड़ों को लगाने का काम लगातार किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के इस कदम से सार्वजनिक हित के कई प्रोजेक्ट रुके पड़े हैं।

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घटते वन क्षेत्र पर चिंता और हाईकोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि

हाईकोर्ट ने 24 दिसंबर 2025 को पंजाब के घटते वन क्षेत्र पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विभिन्न परियोजनाओं और गतिविधियों के लिए पेड़ काटने पर रोक लगा दी थी, जिसमें बाद में समय-समय पर संशोधन किए गए।

हाईकोर्ट का यह आदेश एनएचएआई के जीरकपुर बाईपास प्रोजेक्ट के लिए करीब 5,000 पेड़ काटे जाने के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर आया था। यह प्रस्तावित बाईपास पंजाब के जीरकपुर को हरियाणा में चंडीगढ़-शिमला हाईवे पर स्थित एक टोल प्लाजा से जोड़ता है।

अपने आदेश में हाईकोर्ट ने दर्ज किया था कि पंजाब में कुल भौगोलिक क्षेत्र का केवल 3.67 प्रतिशत हिस्सा ही वनों से आच्छादित है। यह वन क्षेत्र रेगिस्तानी राज्य राजस्थान (4.87 प्रतिशत) की तुलना में भी काफी कम है।

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