मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन (TASMAC) के एक सुपरवाइजर की सेवा बहाली का आदेश रद्द कर दिया है। कर्मचारी को बिक्री की रकम में कथित गड़बड़ी और धन के दुरुपयोग के आरोप में बर्खास्त किया गया था।
जस्टिस एम. धनपानी और जस्टिस एन. दिलीपकुमार की डिवीजन बेंच ने राज्य की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि सरकारी संस्थानों में काम करने वाले और सरकारी धन संभालने वाले कर्मचारियों से उच्चतम स्तर की ईमानदारी और शुचिता की अपेक्षा की जाती है।
1 अक्टूबर के आदेश में कोर्ट ने कहा कि यह मानक उस स्थिति में भी लागू होता है, जब कर्मचारी ऐसे विभाग में काम कर रहा हो जो शराब की बिक्री से जुड़ा हो।
कोर्ट ने माना कि कर्मचारी के खिलाफ लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के थे और वह सरकारी धन संभालने की जिम्मेदारी निभा रहा था।
निरीक्षण में सामने आई थीं गड़बड़ियां
कर्मचारी TASMAC में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था और उसकी तैनाती ओराथानाडु तालुक की शराब दुकानों पर थी।
12 नवंबर 2014 को विभाग ने दुकानों का निरीक्षण किया। इस दौरान दुकानों के संचालन और खातों के रखरखाव में कई गड़बड़ियां सामने आईं।
कर्मचारी और अन्य लोगों के खिलाफ तमिलनाडु प्रोहिबिशन एक्ट और IPC के प्रावधानों के तहत एक आपराधिक मामला भी दर्ज किया गया था। हालांकि बाद में पुलिस ने जांच बंद कर दी।
इसके अलावा एक अन्य मामला भी दर्ज किया गया, जिसमें ऑडिट के दौरान बिक्री से प्राप्त राशि में 1.80 लाख रुपये की कमी या दुरुपयोग पाए जाने का आरोप था।
विभाग ने कर्मचारी को सात आरोपों वाला चार्ज मेमो जारी किया। कर्मचारी ने आरोपों से इनकार किया, लेकिन विभागीय जांच के बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।
सिंगल जज ने बहाली और बकाया वेतन देने का दिया था आदेश
कर्मचारी ने बर्खास्तगी को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
सिंगल जज ने उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को अपर्याप्त मानते हुए बर्खास्तगी का आदेश रद्द कर दिया था। साथ ही कर्मचारी को बकाया वेतन और 6 प्रतिशत ब्याज के साथ सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया गया था।
सिंगल जज ने यह भी पाया था कि आपराधिक जांच के दौरान दर्ज किए गए बयानों और निरीक्षण रिपोर्ट के बीच विरोधाभास था।
इसके बाद TASMAC ने इस आदेश को डिवीजन बेंच के सामने चुनौती दी।
विभागीय जांच में दखल का आधार नहीं मिला
डिवीजन बेंच ने कहा कि कर्मचारी ने यह दावा नहीं किया था कि विभागीय जांच कानून के अनुसार नहीं हुई, अनुशासनात्मक अधिकारी के पास जांच शुरू करने का अधिकार नहीं था या उपलब्ध सामग्री के आधार पर निकाले गए निष्कर्ष पूरी तरह गलत थे।
कोर्ट ने पाया कि कर्मचारी का मामला मुख्य रूप से कुछ गवाहों की जांच न किए जाने और दस्तावेजों के मूल्यांकन पर आधारित था।
बेंच ने कहा कि जब जांच या जांच अधिकारी के खिलाफ पक्षपात अथवा दुर्भावना का कोई आरोप नहीं है, तब कोर्ट विभागीय जांच के निष्कर्ष या कर्मचारी पर लगाई गई सजा को केवल साक्ष्यों के दोबारा मूल्यांकन के आधार पर पलट नहीं सकता।
कोर्ट ने यह भी पाया कि कर्मचारी को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर दिया गया था और विभागीय जांच प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप हुई थी।
इन निष्कर्षों के आधार पर डिवीजन बेंच ने सिंगल जज का आदेश रद्द कर दिया और TASMAC सुपरवाइजर की बर्खास्तगी को बहाल कर दिया।

