पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हत्या के एक आरोपी की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने पाया कि जेल से बाहर आने के बाद आरोपी ने कथित तौर पर इंस्टाग्राम और फेसबुक के जरिए शिकायतकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों को धमकियां दीं।
जस्टिस विक्रम अग्रवाल ने कहा कि आरोपी ने 28 जनवरी को जमानत देते समय लगाई गई एक अहम शर्त का उल्लंघन किया। इस शर्त के तहत उसे मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को सीधे या परोक्ष रूप से धमकी देने, प्रभावित करने या किसी तरह का प्रलोभन देने से रोका गया था।
23 सितंबर के आदेश में कोर्ट ने दर्ज किया कि जमानत पर रिहा होने के कुछ समय बाद ही आरोपी ने शिकायतकर्ता और उसके परिवार को कथित रूप से धमकाना शुरू कर दिया था। उसने शिकायतकर्ता की बहन की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर अपलोड की थीं।
जमानत के बाद शुरू हुईं कथित धमकियां
मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी पर 23 जून 2023 को श्याम लाल की हत्या का मुकदमा चल रहा है। श्याम लाल शिकायतकर्ता के चचेरे भाई मुकुल के यहां काम करता था। घटना के समय शिकायतकर्ता भी कथित रूप से मौजूद था और उसे भी चोट लगी थी।
आरोपी को नियमित जमानत मिलने के बाद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे और उसके पिता को आरोपी के इंस्टाग्राम अकाउंट से धमकी भरे और मानहानिकारक संदेश मिलने लगे। इसी तरह के संदेश फेसबुक अकाउंट से भी भेजे गए।
कोर्ट ने दर्ज किया कि एक संदेश में आरोपी ने लिखा था, “band bja dunga iske chakkar me to sabki”.
आरोप यह भी था कि उसने शिकायतकर्ता की बहन की तस्वीरें अपलोड कीं और उसे भी संदेश भेजे। शिकायतकर्ता के भाई को कथित तौर पर धमकी दी गई कि यदि वह ट्रायल कोर्ट में आरोपी के खिलाफ गवाही देने पहुंचा तो उसकी बहन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर डाल दी जाएंगी।
शिकायतकर्ता की दूसरी बहन को भी आपत्तिजनक संदेश भेजे जाने का आरोप लगाया गया।
शिकायतकर्ता ने 4 मार्च को शिकायत दी थी। इसके बाद 17 मार्च को एक और FIR दर्ज हुई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। वह इसके बाद हिरासत में रहा।
कोर्ट ने माना, जमानत की अहम शर्त का उल्लंघन
शिकायतकर्ता की ओर से एडवोकेट प्रांशुल धुल ने दलील दी कि शिकायतकर्ता और उसके परिवार को सीधे धमकियां दिए जाने के कारण आरोपी की जमानत रद्द की जानी चाहिए।
आरोपी की ओर से एडवोकेट समय संधावालिया ने इसका विरोध करते हुए कहा कि केवल एक घटना के आधार पर जमानत रद्द नहीं की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने माना कि जमानत रद्द करना एक कठोर कदम है और इसे आसानी से नहीं अपनाया जाना चाहिए। कोर्ट ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में तय सिद्धांतों का भी उल्लेख किया।
हालांकि, कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता पक्ष को धमकाकर आरोपी ने जमानत आदेश की सबसे अहम शर्त का उल्लंघन किया है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में आरोपी को जमानत पर बने रहने की अनुमति देने से कोई अप्रिय घटना हो सकती है।
जरूरत पड़ने पर मानसिक स्थिति की जांच के निर्देश
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आरोपी से बातचीत भी की। कोर्ट ने दर्ज किया कि उसका व्यवहार असामान्य था और उसकी बातचीत स्पष्ट नहीं थी।
इसके बाद कोर्ट ने जेल अधिकारियों या अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जरूरत महसूस होने पर आरोपी की मानसिक स्थिति की जांच कराई जाए।
आखिरकार हाईकोर्ट ने 28 जनवरी को दी गई उसकी जमानत रद्द कर दी और संबंधित अधिकारियों को आदेश के पालन के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया।

